अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -89

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इज्जत से बात कर.” रोहन उसे रोकते हुए कहा.

“क्यों तुझे क्यों मिर्ची लग रही है?” परवेज़, रोहन की आँखों में झाँकते हुए कहा.

“क्योंकि बाभी है वो तेरी!”

“हाअ…..अब निकला ना मुंह से तेरे सच!! यही बात पहले ढंग से नहीं बता सकता था?”

“क्यों? तू इतना बेक़रार क्यों था जाने के लिए?” अभी परवेज़, रोहन की बात का कुछ जवाब देता उससे पहले श्रुति ने उन दोनों की तरफ घूम कर कहा

“रोहन!! वहां देखो.” श्रुति ने अपनी डायन और कुछ ही दूरी पर बने हुए एक घर की तरफ इशारा किया. रोहन और परवेज़ भी उसी के बताए हुई जगह पर देखने लगे. उन्होंने ने भी देखा की वो एक मंज़िला घर था.

“यह तो किसी का मकान लग रहा है? और वहां पर रोशनी भी है. इसका मतलब वहां जरूर कोई रहता होगा” परवेज़ ने कहा.

“हां….तुम ठीक कह रहे हो. चलो उधर ही चल कर देखते है.” रोहन ने कहा. फिर वह तीनों उसी मकान की और चलने लगे. जब वह मकान के करीब पहुंचे तो उन्होंने पाया की उसका मैं दरवाजा अंदर से लॉक्ड था

“यह तो लॉक्ड है” श्रुति ने कहा.

“अंदर से लॉक है. और घर के अंदर से रोशनी भी आ रही है इसका मतलब अंदर जरूर कोई है.” रोहन ने कहा.

“वो तो है, लेकिन हम अंदर कैसे जाएँगे और उनसे मदद कैसे माँगेंगे.” परवेज़ ने कहा. रोहन ने जवाब में कुछ नहीं कहा. वो आगे तरफ कर दरवाजा को ज़ोर ज़ोर हिलाने लगा शायद उसके हिलने की आवाज़ से अंदर जो भी है बाहर की और आ जाए.
“अंदर कोई है?” दरवाजा को हिलाने के बाद भी कोई बाहर की और नहीं आया तो रोहन आवाजें देने लगा.

“कमाल है कोई बाहर झाँकने को तैयार ही नहीं है.” परवेज़ ने कहा.

“अब क्या करेंगे?” श्रुति ने कहा.

“करना क्या है अब इस दरवाजा के उप्पर से कूद कर जाना पड़ेगा.” रोहन ने कहा.

“लेकिन यह ठीक रहेगा? ई मीन किसी के घर में इस तरह से घूसना ठीक नहीं लगता मुझे.” श्रुति ने कहा. रोहन उसकी बात पर थोड़ा मुस्कुराते हुए कहा.

“तुम भी कमाल करती हो शूति,यहां हमारी जान पर बन आई है और तुम हो की……” रोहन पूरी बात बोले बिना ही दरवाजा पर चढ़ने लगा. दरवाजा पर चढ़ने के बाद वो दरवाजा के दूसरी तरफ से उतरने लगा. फिर जब वो दरवाजा के उस पार पहुंच गया तो उसने श्रुति से कहने लगा.

“चलो तुम भी इधर आ जाओ जैसे में इधर आया.” रोहन, श्रुति की तरफ देख कर कहा. फिर पहले श्रुति दरवाजा के उप्पर चढ़ के उस तरफ गयी फिर उसके परवेज़ ने भी वैसा ही किया.

“आओ चलो अंदर चल कर देखते है.” फिर वो परवेज़ की तरफ घूम कर कहा. “ज़रा होशियार रहना अंदर कुछ भी हो सकता है.” परवेज़ ने जवाब अपनी गर्दन हिलाकर अपनी सहमति जताई. श्रुति थोड़ा घबराई हुई थी इसलिए उसने रोहन का बायन हाथ पकड़ कर चल रही थी. परवेज़ भी यह सब देख रहा था की कैसे यह लड़की रोहन से चिपक कर चल रही है. उसे बड़ी हैरत हो रही थी की यह कैसे हो गया रोहन एक लड़की से प्यार करने लगा, क्योंकि वो लड़की के ज़ात से ही नफरत करता था. लेकिन उसने सोचा की यह वक्त इन बातों के सोचने का नहीं है. वो किसी और वक्त रोहन से इस बारे में पुच्छ लेगा की आख़िर उसका पत्थर जैसा दिल कैसे पिघल गया.

उन तीनों ने देखा की उस घर का दरवाजा भी अंदर से लॉक्ड था. काफी खटकटने के बावजूद भी उधर से कोई जवाब नहीं आया .

“अगर यह दरवाजा अंदर से बंद है तो जरूर अंदर कोई होगा, लेकिन कोई खोलता क्यों नहीं दरवाजा.” रोहन ने कहा.

“हो सकता है कोई सो रहा हो.” श्रुति ने कहा.

“अब ऐसी कैसी नींद की इतना दरवाजा पीटने पर भी ना खुले.” परवेज़ ने कहा.

“मुझे तो कुछ गड़बड़ लगती है. ” कहते हुए रोहन उस घर के चारों तरफ घूम कर देखने लगा की तभी उसे एक खिड़की खुली हुई मिल
“परवेज़, श्रुति !! अंदर जाने का रास्ता मिल गया. ” दोनों को खिड़की का रास्ता दिखाते हुए रोहन उस खिड़की से अंदर जाने की
कोशिश करने लगा. फिर उसका देखा देखी वो दोनों भी अंदर घुस गये. जब वह तीनों उस अंदर पहुंचे तो उन्होंने पाया
की वो एक बड़ा सा हॉल था जो तकरीबन खाली खाली सा था. फर्नीचर वगैरह कुछ भी नहीं था. उन्हें थोड़ा अजीब लग
रहा था. फिर रोहन ने एक सीधी की तरफ इशारा करते हुए कहा

“उधर देखो! वहां ऊपर के किसी कमरे से रोशनी आ रही है. चलो चल कर देखते है.” फिर वह तीनों उस सीढ़ियों से
चढ़ कर उस कमरे के करीब पहुंचे जहां से रोशनी आ रही थी. उन्हें थोड़ा डर भी लग रहा था उस जगह को देख कर
फिर भी रोहन उस कमरे के दरवाजे का करीब पहुंच कर उसे खोलने की कोशिश करने लगा. लेकिन उसे ज्यादा कोशिश नहीं
करनी पढ़ी क्योंकि वो दरवाजा पहले से ही खुला हुआ था. फिर वह तीनों कदम संभाल संभाल कर अंदर जाने
लगे. लेकिन जब उन्होंने उस कमरे का पूरे दृश्या देखा तो उन्हें एक ज़ोर का झटका लगा. क्योंकि वो एक….

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