अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -90

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2038

लॅबोरेटरी थी. उन्हें
अच्ंभा होने लगा की इस वीरने जंगल में यह लॅबोरेटरी किसने खोल कर रखी हुई है.

“यह क्या है?? लॅबोरेटरी?? वो भी इस वीरने जंगल में?” कहते हुए श्रुति लॅबोरेटरी के चारों और देखने लगी.

“मेरी भी समझ में नहीं आ रहा की यह क्या माजरा है.” रोहन ने कहा.

“रोहन!! उधर देख वहां क्या है.” परवेज़ ने कहा.रोहन, परवेज़ की दिखाई हुई दिशा में देखने लगा तो जैसे उसे 100 वॉल्ट
का बिजली का झटका लगा हुआ हो.

“यह तो….यह तो …..बंदर है.” रोहन उस बंदर के पिंजरे के करीब जाते हुए कहा.

“ओह अब में समझी!! इस लॅबोरेटरी में इस बंदर पर जरूर कोई एक्सपेरिमेंट किया जा रहा होगा.” श्रुति ने कहा.

“और शायद वह सब खूनकर दरिंदे इसी एक्सपेरिमेंट का नतीजा है.” रोहन ने कहा.

“हां…ऐसा ही है…तभी में बोलू की यह किस प्रकार के जानवर है जो दिखने में तो बंदर जैसे है पर इतने खूनकर क्यों है.” परवेज़ ने कहा..

“क्या किया गया होगा इस बंदर के साथ जो यह इतना खूनकर हो गया.” श्रुति उस बंदर के पिंजरे के पास जाते हुए कहा जिसके अंदर वो बंदर एक दम से बेसुध पढ़ा हुआ था. श्रुति जिज्ञासा के मारे उस पिंजरे के करीब जाकर उस बंदर का निरक्षण करने लगी की तभी वो बंदर एक दम से एक अजीब सी आवाज़ निकालता हुआ उसी पिंजरे के अंदर से श्रुति को काट खाने लिए झपटा. श्रुति एक दम से चीख मार्टी हुई पीछे हटी और रोहन से जाकर चिपक गयी. रोहन भी उस बंदर के पास जाकर देखा की इसे अचानक क्या हुआ था. लेकिन वो बंदर थोड़ी देर तक तड़प्ता रहा फिर शांत हो गया.
“यह क्या माजरा है? कुछ समझ में नहीं आ रहा है. कौन इन बंदरों पर इतना बुरा एक्सपेरिमेंट कर रहा है जिसकी वजह से यह लोग की यह हालत हो गयी है.” परवेज़ ने कहा. इससे पहले की रोहन कुछ और कहता अचानक उन्हें लब के बाहर से किसी के कदमों की आवाज़ आने लगी. कदमों की आवाज़ सुनकर वह तीनों पहले थोड़ा चौंके फिर एक कोने में जाकर छिप गये. फिर लब में कोई प्रवेश हुआ. उसके चेहरे पर परेशानी के भाव साफ समझ में आ रहे थे. ऐसा लग रहा था मानो उस पर कितना बड़ा पहाड़ टूट पढ़ा हो. रोहन उस व्यक्ति को देख रहा था की वो उस बंदर के पिंजरे के पास जाकर कुछ मुयएना कर रहा था. फिर कुछ देर बाद उसने पास में रखी हुई एक सरिंज निकाली और फिर उसमें कुछ भरने लगा. फिर उसके बाद वही सरिंज उसने उस बेसुध से पढ़े हुए बंदर को लगाया. उसके कुछ ही पलों बाद वो बंदर एक बार फिर से झपट्टा मारा और उस पिंजरे में इधर उधर तड़प्ता रहा और फिर खामोश हो गया. वो अपनी तसल्ली के लिए एक डंडे से उस बंदर को हिलाने दुलाने लगा. वो यह तय करना चाहता था की उसके अंदर जो दवा उसने डाली है उसका क्या असर हुआ है उस बंदर पर .. उस व्यक्ति के द्वारा जब उस बंदर को हिलाने दुलाने के बाद वो बंदर नहीं हिला तो वो समझ गया की इस बंदर पर वो जो प्रयोग करना चाहता था वो उसमें वो सफल हो गया है. फिर उसके बाद उस व्यक्ति के चेहरे पर एक इत्मीनान सा आ गया मानो उसे ऐसा लग रहा हो जैसे उसके सर पर रखा हुआ भोजा हाथ गया हो. रोहन, परवेज़ और श्रुति यह सब नज़ारा देख रहे थे और समझने की कोशिश कर रहे थे की यह व्यक्ति क्या कर रहा था उस बंदर के साथ और क्यों कर रहा था. लेकिन उनकी कुछ समझ में नहीं आ रहा था इसलिए रोहन अपनी जगह से खड़ा हुआ और सीधा जाकर उस व्यक्ति को जो अब कुर्सी पर इत्मीनान से बैठा हुआ था एक जोरदार मारी की वो कुर्सी समेट दूर जा गिरा. उस व्यक्ति को कुछ समझ में नहीं आया की अचानक यह क्या हुआ. वो पलट कर अपने हमलवार को देखा जो एक बार फिर से उसकी तुकाई करने के लिए तैयार था.
“के..सीसी…कौन हो तुम? “ उसने कहा.
“पहले तू बता मादरचोड़….तू कौन है और इन बंदरों के साथ तू क्या कर रहा है?” कहते हुए रोहन फिर एक जोरदार लात उसकी पिच्छवाड़े पर मारा. वो व्यक्ति रोहन के इस वार से एक दम भॉकला गया.
“त..तुम….कहा से आ आए हो और तुम्हें क्या चाहिए?”
“आबे भोसड़ी के मुझसे सवाल बाद में पूछना पहले यह बता तू कौन है और इस वीरने जंगल में यह सब क्या कर रहा है?” रोहन उसकी बात का जवाब ना देते हुए अब उसके कॉलर से उसको पकड़ते हुए कहा. अब इतनी देर में श्रुति और परवेज़ भी उसके करीब आ चुके थे.
“बब्ब…बताता हूँ…..मेरा नाम……विक्रम है. में एक साइंटिस्ट हूँ और यहां पर में एक केमिकल का टॉक्सिकॉलजी टेस्ट कर रहा था. जिसके लिए मैंने इन बंदरों को छूना था अपने एक्सपेरिमेंट के लिए…..”
“क्या कर रहा था में समझा नहीं?” परवेज़, विक्रम की बात काटते हुए कहा.
“परवेज़ भाई इसका मतलब है की यह जिस केमिकल का टेस्ट कर रहा उसका क्या असर रहता है इसके लिए इसने इन….

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