अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -93

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1990

हेडक्वॉर्टर्स कहा होगा?”
“मुझे पता है.” श्रुति का इतना कहना ही था की वह दोनों हैरत से श्रुति की तरफ देखने लगे जो इस वक्त अपने सामने रखे हुए टेबल पर कुछ पेपर्स को पढ़ रही थी..
“तुम्हें पता है? पर कैसे? हम दोनों को नहीं पता और तुम्हें कैसे पता चल गया.?” रोहन हैरत से कहा.
“इस नक्शे की वजह से” श्रुति उन पेपर्स में से कुछ उठाते हुए दिखाई जो एक नक्शा था.
“नक्शा? यह कैसा नक्शा है?” रोहन हैरत से श्रुति के हाथ में नक्शे को देखते हुए कहा.
“यह इस नेशनल पार्क का पूरा नक्शा है. कौनसा रास्ता किस तरफ जाएगा इसके बारे में पूरी इन्फार्मेशन दी हुई है इसमें.”
“रोहन यह तो बहुत अच्छा हुआ अब आसनई से यहां से निकल सकते है. वैसे हम इस वक्त किधर है श्रुति जी?” परवेज़ ने कहा. शरइत ने नक्शे में किसी एक तरफ उंगली रखकर बताया.
“चलो इस नमूने ने कुछ तो अच्छा काम किया है.” परवेज़ ने कहा.
“अब हमें और देर नहीं करना चाहिए और फौरन फोरेस्ट डिपार्टमेंट के हेडक्वॉर्टर जाना चाहिए. जितनी जल्दी हो सके हमें इस आफत को रोकना होगा.” रोहन, श्रुति से वो नक्शा अपने हाथ में लिया और बारे गौर से फोरेस्ट डिपार्टमेंट के हेडक्वॉर्टर के जाने का रास्ता समझने लगा.

इधर फोरेस्ट डिपार्टमेंट के हेडक्वॉर्टर में…
“विजय जी!! आप घबराए नहीं आपकी बेटी के बारे में जल्द ही हमें कुछ ना कुछ खबर जरूर मिल जाएगी.मैंने अपने कुछ ऑफिसर्स को श्रुति और उसके दोस्तों की तलाश के लिए भेजा है” उमेश ने कहा.
“ज़रा जल्दी करिए उमेश जी!! आप तो जानते है जंगल में कितने खूनकर जानवर घूम रहे है. कही मेरी श्रुति को कुछ हो ना जाए.” विजय से पहले सौंदर्या ने रोते हुए उमेश से कहा.
“देखिए मैडम हम अपनी पूरी कोशिश कर रहे है आप लोग……” अभी वो कुछ और कहते की इतने में उसके केबिन में कोई जूनियर ऑफिसर आकर कहने लगा.
“सर! अभी एक लड़की मिली है. जिसकी हालत इस वक्त बहुत नाज़ुक है और वो बहुत बुरी तरह से जख्मी भी है. हमें जो गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट मिली है यह उन्हीं में से एक लग रही है क्योंकि यह अपना नाम छाया बता रही है.” इतना सुनना था की एक तरफ खड़े छाया के मां बाप चौंक गये और झट से उस ऑफिसर की तरफ बढ़ने लगे.
“कहा है हमारी बच्ची!! हम….हम उसके पेरेंट्स है….प्लीज़ जल्दी से हमें उससे मिलवओ..” इतनी देर उमेश भी उन दोनों के पास आ गया और उस ऑफिसर से कहने लगा.
“इस वक्त वो लड़की किधर है?” उमेश ने कहा
“सर! यही सर उसका ट्रीटमेंट चल रहा है.” उस ऑफिसर ने जवाब दिया.
“ओके चलो देखते है उसे!! आप लोग भी आइये मेरे साथ.” उमेश उन सारे पेरेंट्स से कहता हुआ उधर चला गया जहां छाया का उपचार चल रहा था.
छाया जो इस वक्त एक दम बेहाल हुई थी. जगह जगह से उसके कपड़े पाते हुए थे और उन पाते हुई जगह से उसके गहरे गहरे जख्म साफ नज़र आ रहे थे. दूर से देखने में मालूम पढ़ रहा था की उसपर कितना अत्याचार हुआ होगा.डॉक्टर्स और नर्स उसका जल्दी से उपचार करने लगे. अभी उसकी सारी ड्रेसिंग अभी पूरी हुई थी की उस कमरे में यकायक ढेर सारे लोग प्रवेश कर गये. पहले उमेश आया फिर उसके पीछे पीछे छाया के मां बाप. और आते ही वह छाया से गले लग रख रोते रहे. फिर काफी देर वो भावक शान खत्म हुआ तो उमेश ने छाया से सवाल पूछने लगा.
“छाया? अब तुम कैसा फील कर रही हो?”
“पहले से बेहतर.” छाया ने जवाब दिया
“अच्छा छाया तुम्हारे दोस्त कहा है इस वक्त?” उमेश ने कहा. उमेश का इतना कहना था की छाया फिर से फूट फूट कर रोने लगी.
“क्या हुआ छाया बेटी तुम कुछ बोलती क्यों नहीं? कहा है मेरा बेटा निखिल?” संजीव सान्याल जो निखिल के पिता थे काफी देर से चुप बैठे हुआ था. छाया को रोता देख कर उससे पूछने लगे.
“अंकल…..निखिल इस नो मोर .” रोते रोते छाया ने बताया. इतना सुनना था की संजीव ज़ोर ज़ोर से रोने लगा. और इतना सुनना था की बाकी के और पेरेंट्स भी घबरा गये और सब एक साथ अपने बच्चों के बारे में छाया से सवाल पूछने लगे. यह देखकर छाया और घबरा गयी. उमेश ने उन्हें बड़ी मुश्किल से रोका और फिर से छाया से पूछने लगा.
“छाया? क्या तुम हमें पूरी बात बनाएगी की तुम यहां कैसे पहुँची? क्योंकि तुम लोग का प्लान तो नैनीताल जाने का था तो यहां कैसे तुम सब लोग पहुंच गये?”
“वो दो गुंडों की वजह से.” छाया ने रोते हुए कहा.
“गुंडे? कौन गुंडे और इस वक्त कहा है?” उमेश थोड़ा हैरत से पूछा.
“मुझे नहीं पता वह दोनों इस वक्त कहा है. वह बस हमें अपने साथ में बंदी बनाकर यहां लाए थे और फिर हमें अकेला छोड कर चले गये थे.”
“एक काम करो छाया तुम हमें शुरू से सारी बताओ की तुम्हारे साथ में क्या क्या हुआ था और यह गुंडे कौन थे जो तुम्हें और तुम्हारे दोस्त से मिले थे.” उमेश ने कहा. फिर उसके बाद छाया ने सारी बात बता दी ढाबे से लेकर और नेशनल पार्क….

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