अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -94

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1875

में रोहन और परवेज़ ने उन्हें बंदी बनाकर लाए थे सब बता दिया.
“लेकिन वह तुम लोगों को ज़बरदस्ती अपने साथ क्यों इस नेशनल पार्क में लाए थे जब वह यूँही तुम लोगों को छोड़ दिए.”
“ई डोंट नो……..शायद उन्हें नेशनल पार्क एंट्री करने में किसी चीज़ का डर था….मेरे ख्याल से वह हमें इसलिए अपने साथ लाए थे ताकि अगर हम सब उनके साथ रहेंगे तो उन पर किसी का शक़ुए नहीं जाएगा और वह आसानी से नेशनल पार्क में एंटरयकर लेंगे.”
“सर!! मेरे ख्याल से यह उन्हीं पोचर्स में से कोई होंगे जिनकी हमें तलाश थी. शायद उन्हें कही से मालूम पढ़ गया होगा की हमें उनकी तलाश है तो इन्हें अपनी ढाल बनाकर यहां पर लाए होंगे.” उस जूनियर ओफ्फ्सेर्स ने उमेश से कहा.
“हम….यही हो सकता है. वरना वह इन्हें नेशनल पार्क में एंट्री करने के बाद यूँही नहीं छोड देते.” उमेश थोड़ा घंभी स्वर में कहते हुए कहा.
“ओके छाया फिर उसके बाद क्या हुआ. जब वह दोनों तुम सबको छोड कर चले गये थे?” उमेश ने फिर से छाया से सवालों का सिलसिला चालू कर दिया. उसके बाद छाया ने विस्तार से उन सबको वही बताया जो उसके और उसके दोस्तों के साथ उन बंदारो का हमला हुआ था.
“खैर में कैसे कैसे कर के अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकली. मुझे नहीं लगता शायद मेरे अलावा कोई और बच्चा होगा. वह इतने खूनकर थे की वह शायद ही किसी को बख़्शे होंगे.” छाया ने कहा. छाया का इतना कहना था की बाकी के सारे पेरेंट्स हें हें करने की आवाजें आने लगी वह अपने बच्चों की मौत की खबर जो सुन लिए थे. लेकिन फिर भी विजय को भरोसा नहीं था की उसकी श्रुति इतनी आसानी से उसे छोड कर जा सकती है. वो फिर से छाया से सवाल पूछने लगा.
“छाया बेटा? क्या तुमने श्रुति को भी उन दरिंदो का शिकार बनते ड्यू देखा था?”
“नहीं अंकल मैंने तो नहीं देखा था……..” फिर छाया कुछ सोचते हुए बोली .” हां मुझे याद आया की उन जानवरो में से एक ने श्रुति के पीछे लपका जरूर था लेकिन वो उसे पकड़ नहीं पाया था क्योंकि उससे पहले ही श्रुति उस खाई में गिर गयी थी.” यह सुनकर सौंदर्या एक घबरा गयी.
“क्या!!!! मेरी बेटी खाई में गिर गयी थी. ओह नूऊऊओ…….विजय अब क्या होगा?”
“एक मिनट सौंदर्या रुको….” सौंदर्या को चुप कराकर विजय फिर से छाया से पूछने लगा.
“अच्छा छाया यह बताओ जिस खाई की तुम बात कर रही हो क्या वो बहुत गहरी थी? मेरा मतलब है की अगर वहां से कोई गिरता है तो क्या जरूरी है की वो अपनी जान खो बैठे?”
“ई थिंक……नो………ऐसा कोई जरूरी तो नहीं है क्योंकि वो खाई इतनी डीप भी नहीं मगर इतनी शॅलो (कम गहरी) भी नहीं थी.मेरे ख्याल से हो सकता है श्रुति वहां से गिरकर ज़िंदा भी हो. लेकिन उन जानवारो का कोई भरोसा नहीं अगर वो इतने दीनों तक ज़िंदा भी होगी तो वह जरूर उसे कोई ना कोई नुकसान जरूर पहुंचाए हुए होंगे.”
“हो सकता है जिस तरह तुम अपनी जान बच्चा कर आई हो उसी तरह मेरी श्रुति भी आ जाए.” सौंदर्या ने रोते हुए कहा.
“ हो सकता है और नहीं भी. अगर उसकी किस्मत अच्छी रही तो वो शायद ज़िंदा भी बच जाए.” छाया थोड़ा मुंह बनाते हुए बोली क्योंकि अभी तक उसके दिल में श्रुति के लिए नफरत जो भारी थी.
“जरूर आएगी मेरी बेटी.” कहते हुए विजय, उमेश की तरफ देख कर कहा.
“उमेश जी!! ई होप के मेरी बेटी अभी भी ज़िंदा हो सकती है. हमें एक बार फिर से उसे जगह पर जाकर देखना चाहिए. शायद वो हमें मिल जाए. पता नहीं मेरी बेटी इस वक्त किस हाल में होगी.”
“रिलॅक्स मिस्टर. विजय! हम एक बार फिर जाएँगे श्रुति को ढूँढे. बस मुश्किल यह है की इस वक्त रात के अंधेरे में किसी की तलाश करना मूसखिल है. अब हमें सुबह ही सर्च ऑपरेशन करना पड़ेगा.

उधर सवेरा होते ही रोहन, श्रुति और परवेज़ , विक्रम की गाड़ी लेकर हेडक्वॉर्टर के लिए निकल पढ़े थे. उन्होंने ने विक्रम को भी अपने साथ बंदी बनकर लिया हुआ था और उन दरिंदो से सामना करने के लिए वो डार्ट गन्स भी ली हुई थी अपने साथ. अभी वह आधा ही रास्ता पार किए थे की अचानक जिस गाड़ी पर वह बैठे हुए थे उस पर गोलियाँ चलने लगी और एक गोली जाकर गाड़ी के तैयार पर जा लगी. रोहन जो गाड़ी चला रहा था अचानक हुए इस हमले से अपना नियंत्रण खो बैठा और गाड़ी सीधा जाकर एक पेड़ से जा टकराई. अचानक हुए इस हमले से कोई संभाल नहीं पाया था और अंदर बैठे सभी लोगों को चोटें भी आई थी. श्रुति आगे की सीट पर बैठे होने के कारण बेहोश हो गयी थी और रोहन भी काफी हद तक घायल हो गया था. पीछे बैठे हुए परवेज़ और विक्रम को हल्की सी चोटें आई थी. रोहन को समझ ही नहीं आ रहा था यह अचानक कौन इन पर गोलियाँ बरसाने लगा था. वो अपनी हालत को सुधरते हुए यह सब सोच ही रहा था की तभी उस गाड़ी का….

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