अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -95

0
2287

दरवाजा खोलते हुए कई सारे फोरेस्ट रेंजर्स अपनी गुण से उसको निशाने बनाने लगे.
“बाहर निकलो!! जल्दी!!” वो फोरेस्ट रेंजर चिल्लाता हुआ रोहन से कहा. रोहन उस फोरेस्ट रेंजर की बातों को नजरअंदाज करते हुए अपनी भाई और देखा जहां श्रुति घायल अवस्था में बेहोश पढ़ी हुई थी.
“श्रुति? शुर्ती? तुम ठीक हो??” रोहन, श्रुति को हिलाते हुए कहा. रोहन को अपनी बातों पर अमल ना करते हुए उस फोरेस्ट रेंजर ने उसकी तरफ का दरवाजा खोला और उसे जबरन बाहर निकालने लगा. फिर देखते ही देखते उन्होंने सभी को अपने हिरासत में ले लिया. श्रुति को उन्होंने अपनी एक गाड़ी में बारे प्यार से लिटा दिया था. अचानक हुए इस हमले को रोहन समझ ही रहा था की तभी उसने देखा की एक औरत और एक आदमी जिनकी उमर 45 से 50 के आस पास थी और उन दोनों के साथ में एक लड़की भी उसे नज़र आई. लेकिन उस लड़की को देखकर उसे 1000 वॉल्ट का झटका सा लगा क्योंकि यह लड़की कोई और नहीं बल्कि उन्हीं लड़कों और लड़कियों में से एक थी जिन्हें वो और परवेज़ बंदी बनाकर लाए थे. उसे बड़ी हैरत हो रही की यह लड़की उन दरिंदो के हमले में कैसे बच गयी. फिर तभी उसे एहसास हुआ की अचानक उन लोगों पर यह हमला क्यों हुआ था. क्योंकि वो समझ गया था की यह लड़की फोरेस्ट डिपार्टमेंट वालो को उसके और परवेज़ के बारे में सब बता दी होगी और तभी यह लोग उनको ढूँढते हुए यहां तक आ गये.
“यही है सर!! यही दोनों है!! जिन्होंने मुझे और मेरे दोस्तों को किडनॅप करके यहां लाए थे. और उन लोगों को की मौत के जिम्मेदार भी यही दोनों है.” छाया, उमेश को रोहन और परवेज़ के बारे में बताने लगी
“लेकिन मेरी श्रुति किधर है?” सौंदर्या जो एक दम घबराई हुई थी उसने कहा. तभी उन फोरेस्ट रेंजर में एक ने कहा.
“हमें इनके पास से एक लड़की बेहोशी की अवस्था में मिली है, आइये और उसे शिनाकस्ट कीजिए.” कहता हुआ वो ऑफिसर विजय और सौंदर्या को उस गाड़ी की तरफ ले गया जिसमें श्रुति बेहोशी की अवस्था में थी. और फिर जैसे ही उन दोनों ने श्रुति को घायल और बेहोशी की अवस्था में देखा तो बिलक बिलक कर रोने लगे.
“हां यही तो है हमारी श्रुति. ओह माइ गॉड!!! इसकी हालत तो देखो विजय!. क्या किया है इस जालिम ने मेरी बेटी के साथ में.” श्रुति को अपने से गले लगते हुए सौंदर्या ने कहा.
“घबराइए नहीं इसे ज्यादा चोट नहीं आई है. इसे जल्द ही होश आ जाएगा.” उस ऑफिसर ने कहा. सौंदर्या को श्रुति के पास चोद कर विजय एक दम गुस्से की हालत में सीधा जाकर रोहन के गाल पर लगातार थप्पड़ मारने लगा.
“कमीने तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी फूल जैसी बेटी के साथ यह सब करने की. में तेरा वो हाल करूँगा की तेरी सात पुश्ते भी तुझे पहचान नहीं पाएगी हरंखोर!!!!!!” फिर बड़ी मुश्किल से उसे च्छुदाया गया. जब विजय को रोहन से अलग किया गया तो रोहन, उमेश की तरफ देखते हुए कहा.
“सर में मानता हूँ मैंने गलत काम किया है. लेकिन यह वक्त इन सब बातों का नहीं है. हमें सबसे पहले उन जानवरो को रोकना पड़ेगा जो इस जंगल में आतंक मचा के रखे हुए है. और उन्हें रोकने के लिए मैंने मेरे पास इसका तोड़ भी है.” रोहन की बात सुनकर उमेश एक दम चौंक सा गया.
“क्या कहा तुमने?? तुम्हारे पास इसका तोड़ है. कैसे??” फिर रोहन ने उसे सारी बात बता दी. सारी बात जाने के बाद उमेश का तो सर ही घूम गया.
“कुत्ते कमीने तेरी नालयकी की वजह से हमें कितनी बड़ी मुसीबत उतनी पढ़ रही इसका तुझे अंदाज़ा है? उमेश, विक्रम को लताड़ता हुए कहा. फिर उमेश ने अपने जूनियर ऑफिसर को बुलाया और कहने लगा.
“लगता है हमें मिलिटरी की मदद लेनी पड़ेगी इस पूरे ऑपरेशन के लिए. तुम एक काम करो जल्द से कुछ साइंटिस्ट्स की टीम तैयार करो, और इस ससेंटिस्ट ने जो आंटिडोट तैयार किया है उसी फ़ॉर्मूले के बसे पर और आंटिडोट तैयार करो. हमें जल्द से जल्द उन जानवरो को रोकना पड़ेगा वरना प्रलय आ जाएगी.”
फिर कुछ देर बाद्ष्रुति को होश आता है तो वो देखती है की उसके मम्मी और पापा उसके पास खड़े हुए थे. वो उठने की कोशिश करने लगी तो उसके सर में थोड़ा दर्द होने लगा. उसने अपने हाथ को अपने सर पर रखा तो मालूम पड़ा की उसके सर पर पट्टी बँधी हुई है. फिर उसे अचानक याद आया की उसके सर में चोट कैसे लगी थी. फिर वो और शॉक हो गयी की उसके मम्मी और पापा यहां पर कैसे आ गये और रोहन और परवेज़ किधर है.
“मामा, पापा आप दोनों यहां पर कैसे?” लेकिन सौंदर्या उसकी बात का जवाब ना देते हुए सीधे उसके हाल चाल पूछने लगी.
“मेरी बच्ची तुम्हें होश आ गया! अब तुम कैसा फील कर रही हो?”
“ई’में ओके मामा. बस सर में थोड़ा दर्द है. लेकिन आप यह बताए की आप दोनों यहां कैसे पहुंच गये? और रोहन कहा है?”
“रोहन? कौन रोहन?” सौंदर्या, विजय की तरफ सवालिया निगाहों से….

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here