अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -96

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देखने लगी. विजय ने भी खड़े उचकाकर इस बात का इशारा दिया की उसे भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.
“मामा, पापा, रोहन!! अगर में आज आप लोगों के सामने ज़िंदा हूँ तो सिर्फ़ उसी की वजह से.”
“यह तुम क्या कह रही हो श्रुति? जिसने तुम्हारा किडनॅप किया तुम उसी के लिए कह रही हो की उसने तुम्हारी जान बाचाई. यह तो अच्छा हुआ हम सब समय रहते हुए वहां पहुंच गये. वरना वो कमीना तुम्हारा साथ और क्या करता.” विजय ने कहा.
“आपको किसने कहा की उसने मेरा किडनॅप किया था? और वैसे वो है कहा इस वक्त?” श्रुति ने कहा. सौंदर्या और विजय एक दूसरे को अजीब सी नज़रो से देखने लगे. उनको कुछ ना बोलता देख श्रुति थोड़ा चिंचित होते हुए फिर से कहने लगी.
“मामा! पापा! आप लोग कुछ बोलते क्यों नहीं कहा है रोहन…..और उसका दोस्त परवेज़ वो कहा है?” अपनी बेटी को उनके बारे में इतना चिंचित होते हुए देख कर वह भी थोड़े चिंतित हो गये. यह देखकर सौंदर्या , श्रुति से कहने लगी.
“श्रुति? तुम उन दोनों को लेकर इतना क्यों टेन्शन में हो?”
“मामा प्लीज़………..पहले मुझे बताओ रोहन इस वक्त कहा है?” श्रुति एक दम बेक़ारारी से कहने लगी
“वह दोनों इस वक्त पुलिस की गिरफ्त में है.” विजय ने कहा.
“क्या कहा!! पुलिस की गिरफ्त में? पर क्यों??” श्रुति एक दम से व्याकुल होते हुए कहा. अब उन दोनों को श्रुति को संभालना मूसखिल हो रहा था क्योंकि वो अब अपने आपे से बाहर हो रही थी. फिर काफी देर बाद उन दोनों ने बड़ी मुश्किल से उसे काबू में किया और उसके बाद विजय और सौंदर्या ने बारे आराम से उसे बताया की कैसे उन दोनों को पता चला की श्रुति इस जंगल में है और कैसे छाया के जरिए उन्हें यह पता चला की रोहन और परवेज़ उसे और उसके दोस्तों को किडनॅप किया था. जब श्रुति को यह पता चला की छाया ज़िंदा है तो पहले उसे बड़ी हैरत हुई यह की वो कैसे उन दरिंदो से बच गयी. फिर उसे वो बातें याद आने लगी जो रोहन ने उसे बताया था जो छाया और उसके दोस्त उसके साथ मिलकर करने वाले थे. फिर वो यह सोचने लगी के एक तो रोहन और परवेज़ पर पहले से ही फोरेस्ट ऑफिसर्स की नज़र थी और उसके बाद छाया की वजह से उन्हें यह भी पता चल गया की वह दोनों अब किडनॅपिंग में भी शामिल थे. इसका मतलब अब उन दोनों पर अब डबल चरगेशीट लगेगा. एक तो उनके पोचेर्स होने का और दूसरे किडनॅपिंग का. अब वो बजाए जज़्बाती होने वो यही सोच रही थी के उनको बचाया कैसे जाए. सबसे पहले उसने यह काम किया की छाया और उसके दोस्तों का जो प्लान था उसके खिलाफ उस बारे में उसने किसी से उसका जिक्र करना अभी ठीक नहीं समझा. वो चाहती थी की यह बात डायरेक्ट छाया से की जाए. और फिर यही सब सोच कर वो एक प्लान करने लगी.

फिर उसके 4 दीं बाद,
रोहन और परवेज़ जेल की काल खोत्री में कैद थे. जहाँ पर रोहन अपने और श्रुति के रिश्ते के बारे में सोच रहा था. वो सोच रहा था की वो और परवेज़ क्या करने आए थे इस जंगल में और क्या हो गया उनके साथ में. वह दोनों तो यही सोचकर आए थे की की आखिरी बार एक बड़ा हाथ मारेंगे और फिर उसके बाद इस धंधे को चोद वह एक इज्जत की जिंदगी जियेंगे. लेकिन उनके साथ क्या हो गया. पहले वह दोनों फोरेस्ट ऑफिसर्स से च्चिपने के लिए श्रुति और उसके दोस्तों की किडनॅपिंग की , फिर उसके बाद उन भयानक जानवरो से उनका सामना हुआ, फिर उसके बाद उसे प्यार हो गया वो भी उस लड़की के साथ जिसे उसने ही किडनॅप किया था और अब उसकी यह गिरफ्तारी. फिर वो सोचने लगा की यह तो होना ही था. देर सवेर उसे इन लोगों के हाथ तो लगना ही था. लेकिन अब समस्या यह थी अब उसे श्रुति से प्यार हो गया था और वो उसके बिना एक पल भी जिंदगी जीने का तसवउर भी नहीं कर सकता था. फिर उसने यह सोचा की चलो एक तरह से यह अच्छा ही हो गया क्योंकि अगर वो श्रुति के साथ भी रहा तो क्या जिंदगी देगा उसे. क्योंकि वो जानता था की श्रुति ऊंचे महलो वाली लड़की है, वो उसे गरीबी के अलावा कुछ नहीं दे सकता था. वो और भी यह बातें सोचता रहा की तभी अचानक उसकी काल खोत्री का दरवाजा खुला और एक हवलदार अंदर आया और उन्हें बताने लगा.
“बाहर चलो. तुम दोनों की ज़मानत हो गयी है.” उन दोनों के कानों को तो विश्वास ही नहीं हो रहा था की वह दोनों अभी अभी क्या सुने है. उन्हें बड़ा आश्चर्य हो रहा था की भला उनकी ज़मानत कौन करा सकता है. फिर वह दोनों जब बाहर निकले तो उन्हें एक महिला दिखी जिसने उन दोनों की ज़मानत करवाई थी.
“तुम दोनों अब जा सकते हो. लेकिन याद रखना आज के बाद यह काम किए तो काफी महँगा पड़ेगा.” उस थाने के इंचार्ज….

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