अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -97

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ने कहा.फिर वो महिला उन दोनों के पास आई और उन दोनों से कहा.
“मेरे साथ ज़रा बाहर आओ.” फिर उन दोनों ने वैसा ही किया जैसा उस महिला ने कहा था. बाहर आकर वो महिला फिर उनसे कहने लगी.
“जानते हो में कौन हूँ?” रोहन और परवेज़ पहले एक दूसरे को देखे फिर उस महिला की तरफ देखते हुए कहा.
“नहीं हम नहीं जानते. कौन है आप और हमारी ज़मानत क्यों कराईए आपने.” रोहन ने कहा.
“अपनी बेटी से मजबूर होकर मैंने तुम दोनों की ज़मानत कराई है.”
“में कुछ समझा नहीं.” रोहन ना समझने वाले अंदाज़ में कहा.
“मतलब यह की में श्रुति की मां हूँ. और उसी की वजह से मुझे मजबूर होना पड़ा.” रोहन और परवेज़ को हैरत होने लगी की आख़िर श्रुति की मां उन दोनों की ज़मानत क्यों कराएगी.
“बड़ी बदकिस्मती की बात है मेरी बेटी तुम जैसे लफंगे से प्यार करने लगी है. पता नहीं तुमने उसपर क्या जादू कर दिया है. एनीवे उसी की वजह से तुम दोनों के ऊपर से किडनॅपिंग के चार्जस हटाए गये है. इसलिए तुम दोनों की ज़मानत आराम से हो पाई है. मेरा बस इतना कहना है की अब तुम्हें यह जो
नयी जिंदगी मिली है उसे ढंग से जियो और जितनी जल्दी हो सके श्रुति के दिल से और इस शहर से हमेशा हमेशा के लिए चले जाओ.”
“में एक बार श्रुति से बात करना चाहता हूँ.” रोहन ने कहा.
“कोई जरूरत नहीं है इसकी. और वैसे भी क्या बात करोगे. तुम जाओगे और उससे मीठी मीठी बातें करोगे और वो फिर से पिघल जाएगी. वो तो अभी नादान है, नहीं समझती है इन बातों को की तुम्हारे साथ रहकर वो क्या करेगी. लेकिन तुम तो समझते हो ना. अगर तुम उससे सच्चा प्यार करते हो तो क्या तुम यह बर्दाश्त कर सकोगे की वो महलो से निकल कर तुम्हारे साथ गरीबी की जिंदगी गुजरे. बेहतर यही होगा की तुम अभी और इसी वक्त यहां से निकल जाओ.” कहने के साथ ही सौंदर्या अपनी गाड़ी में बैठ गयी.
“अब क्या करेगा रोहन?” सौंदर्या के जाने के बाद परवेज़ ने रोहन से कहा.
“वो ठीक ही कह रही है परवेज़. मेरे साथ रहकर श्रुति का कोई भाविशया नहीं है. वो जहां है वही उसे रहने देना चाहिए. तू एक काम देहरादून चलने की तैयारी कर वही जाकर अब हम कोई दूसरा काम देखेंगे.” रोहन ने कहा.

श्रुति गुमसुम सी अपने कमरे में बैठे हुई थी. वो इतनी बड़ी मुसीबत से और इतने भयानक जंगल से निकल कर आई थी यह सोचकर उसे खुश होना चाहिए था. लेकिन हो रहा था उसके उलट. वो सोच रही थी भले ही भी उस भयानक जंगल और उन दरिंदो के बीच घिरी हुई थी, लेकिन उसे फिलहाल वही अच्छा लग रहा था क्योंकि उस वक्त उसके साथ उसका महबूब रोहन था. वो सोच रही थी की भले ही वो कितनी भी बड़ी परेशानी में थी लेकिन वो रोहन से कितनी प्यार बातें किया करती थी. यही वो वक्त था जहाँ अपने सपने वाले शहज़ादे से मिली थी. उसे तो रोहन अब अपने सपने वाले शहज़ादे से भी प्यारा लग रहा था. उसका बहुत मन कर रहा था अपने रोहन से दोबारा मिलने का, लेकिन वो मजबूर थी. क्योंकि उसकी मां सौंदर्या को रोहन पसंद नहीं था और उसने धमकी दी थी की अगर उसने रोहन से कोई रिश्ता नहीं थोड़ा तो वो रोहन और परवेज़ को और बुरी तरह फंस्वाकार उन्हें लंबे समय के लिए जेल की हवा खिलवाएगी. श्रुति ऐसा बिलकुल भी नहीं चाहती थी की उसका महबूब जेल की सलाखों के पीछे अपनी उमर गुज़ारे. वो यही सोच रही थी की रोहन से दूर होने में ही उसकी भलाई है क्योंकि कम से कम वो भले ही तक़लीफ़ में रहे लेकिन रोहन आज़ाद होकर अपनी जिंदगी दोबारा से शुरू कर सकता है और इसके अलावा उसके ऊपर उसके परिवार की ज़िम्मेदारिया भी है. यही सब सोचकर उसने रोहन से दूर रहना ही बेहतर समझा. फिर काफी देर श्रुति यही सब बातें सोचती रही की तभी उसकी सोच का सिलसिला तब टूटा जब उसके कमरे में प्रवेश होती अपनी मां को उसने देखा. वो झट से अपनी जगह से उठी और अपनी मां के पास जाते हुए कहा.
“क्या हुआ मामा? उन्हें ज़मानत मिली?”
“हां मिली. और मैंने रोहन से कह दिया है की वो तुम्हारे जिंदगी से और इस शहर से दूर चला जाए. और आज के बाद तुम भी उससे कोई कॉंटॅक्ट करने की कोशिश नहीं करोगी. क्योंकि तुमने मुझसे वादा किया था की अगर में उन्हें ज़मानत दिलवती हूँ तो तुम उसे भूल जाओगी. वरना तुम भी अच्हसे से जानती हो की वह दोनों कितनी बड़ी मुश्किल में पढ़ने वाले थे.” सौंदर्या ने कहा.
“ओके……मामा….जैसा आप कहें……वैसा ही होगा.” श्रुति ने रोते हुए कहा. श्रुति को रोता देख सौंदर्या को थोड़ा एहसास हुआ की उसे इतने खातोर् लहज़े में बात नहीं करनी चाहिए थी इसलिए वो थोड़ा नर्म पढ़ते हुए बोली.
“देखो बेटी बुरा मत मना, में तुम्हारे भले की लिए बोल रही हूँ. रोहन के साथ जिंदगी गुजार कर तुम्हारा कोई फ्यूचर नहीं था. खुद रोहन भी इस बात को समझ गया है….

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