अंधेरा कायम रहे – थ्रिल्लर हॉरर स्टोरी -98

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क्योंकि मैंने उसे और उसके दोस्त को रेलवे स्टेशन की तरफ जाते हुए देखा था. क्योंकि वो जानता है की तुम अभी नादान हो. तुम्हारे आगे पूरी जिंदगी पढ़ी है. तुम कहा उसके साथ रहकर गरीबी की जिंदगी गुज़रगी.” लेकिन जवाब में श्रुति ने कुछ नहीं कहा बस जाकर अपने बेड के ताक़िए से अपना मुंह छुपा कर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी. यह देख कर सौंदर्या उसके करीब जाकर उसे दिलासा देने लगी. उसे श्रुति का रोना नहीं देखा जा रहा था आख़िर वो मां जो ठहरी. लेकिन उसे यह नहीं मालूम था की श्रुति और उसके बीच अभी जो बातचीत हुई उसे दरवाजा पर खड़ा विजय ने सुन लिया था.
“सौंदर्या!! यह तुम क्या कर रही हो. फिर से अपनी बेटी की जिंदगी तबाह करने पर तुली हुई हो.” पहले तो विजय को यूँ अचानक देखकर सौंदर्या थोड़ा घबरा गयी, फिर संभालते हुए कहा.
“यह तुम क्या कह रहे हो विजय? में इसकी जिंदगी संवारने की कोशिश कर रही हूँ और तुम कह रहे हो की में तबाह कर रही हूँ?” लेकिन विजय, सौंदर्या की किसी बात का जवाब ना देते हुए श्रुति के करीब जाकर उसका खंडा पकड़ उसे उठाने लगा. फिर उसने देखा की श्रुति का रो रो के बुरा हाल था.
“देखो सौंदर्या इसकी आँखों में देखो. क्या तुम्हें इस पर रहम नहीं आता. तुम्हें क्या लगता है तुम रोहन को इससे दूर करोगी तो क्या यह खुश रही पाएगी. नहीं!! जीते जी यह मर जाएगी क्योंकि यह उससे सच्चा प्यार करने लगी है. और में अपने बेटी के जज़्बात का पूरा सम्मान करता हूँ. मेरी बेटी ने जिंदगी में पहला कोई काम अच्छा किया है. मुझे फख्र है अपनी बेटी पर और मुझे उम्मीद है रोहन पर की वो मेरी श्रुति को जिंदगी भर खुश रखेगा क्योंकि अगर श्रुति हमारे सामने है तो सिर्फ़ रोहन की मेहरबानियो की वजह से.”
“यह तुम क्या कह रहे हो? उसने कोई एहसान नहीं किया है इस पर क्योंकि वो इसी की वजह से उस जंगल में फाँसी थी. यह तो उसका फर्ज था जो उसने इसकी जिंदगी बचाई है.” सौंदर्या ने कहा.
“ सौंदर्या तुम्हें पूरी बात मालूम नहीं है इसलिए तुम ऐसा कह रही हो लेकिन जब तुम बाहर गयी हुई थी तब श्रुति ने मुझे सारी बात बताई. रोहन ने उसे उस उन दरिंदो से ही नहीं बल्कि उसके दरिंदे दोस्तों से भी बचाया है.” विजय ने बताया.
“इसके दोस्तों से!! में कुछ समझी नहीं तुम क्या कह रहे हो विजय.” फिर विजय ने उसे पूरा घटनाक्रम बताया की कैसे उसके दोस्त उसे बहका कर फ़ायरवेल्ल पार्टी के लिए उसके साथ क्या करना चाहते थे फिर कैसे रोहन ने उन लोगों का किडनॅप करके श्रुति को उन लोगों से बच्चा लिया था. पूरी बात सुन कर सौंदर्या का दिमाग एक दम से चकरा गया. वो सोच भी नहीं सकती थी श्रुति के दोस्त इतनी नीच भारी हरकत भी कर सकते थे.
“विजय हमें उनके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए. वह ऐसा कैसे कर सकते है हमारी बेटी के खिलाफ.”
“नहीं मामा इसकी कोई जरूरत नहीं है. और वैसे भी किसके खिलाफ एक्शन लेंगे क्योंकि सिर्फ़ छाया के अलावा अब कोई ज़िंदा नहीं बच्चा है. उन सभी को अपने किए की सजा मिल चुकी है.” फिर उसके बाद सौंदर्या ने भी इस बात पर कोई बहस नहीं की.
“चलो बेटी में तुम्हें तुम्हारे रोहन से मिलवा दम, अगर देर हो गयी तो उसके ट्रेन चली जाएगी.” विजय ने श्रुति से कहा.
“लेकिन विजय यह तो सोचो श्रुति उसके साथ कैसे जिंदगी गुज़ारेगी? वो क्या खिलाएगा हमारी फूल जैसी बच्ची को?” सौंदर्या चिंचित होते हुए बोली.
“देखो सौंदर्या अब हमारी श्रुति बड़ी हो गयी है अगर उसे लगता है की वो रोहन के साथ अपनी पूरी जिंदगी बसर कर सकती है चाहे गरीबी में रहे या कैसे भी रहे तो इस बात का फैसला हमें इस पर छोड देना चाहिए.” फिर विजय, श्रुति की तरफ देखकर कहा. “ श्रुति जल्दी चलो, कही देर ना हो जाए!”
अब की बार सौंदर्या ने भी कुछ नहीं कहा और विजय ने श्रुति का हाथ पकड़ अपनी गाड़ी में बिठाया और चल पड़ा रेलवे स्टेशन की और.

रोहन और परवेज़ ट्रेन में बैठ चुके थे. उनकी ट्रेन को छूटने में 10 मिनिट्स बाकी थे. रोहन एक दम उदास सा अपना सर सीट पर टिकाए हुए आँखें बंद कर पता नहीं क्या सोच रहा था और परवेज़ भी अपने दोस्त को गमगीन होते हुए देखकर खुद भी गमगीन होकर खिड़की के बाहर देखे जा रहा था. उसे बड़ा गुस्सा आ रहा था श्रुति की मां पर उसने कैसे दो प्यार करने वालो को जुड़ा कर दिया था और चाह कर भी वो कुछ नहीं कर पा रहा था. अभी वो यही सब सोच ही रहा था की वो एक दम से चौंक गया क्योंकि उसने अपनी खिड़की से कुछ ऐसा देखा की उसे बड़ी हैरत हुई. उसने जल्दी से रोहन को हिलाते हुए खिड़की से बाहर दिखाने लगा.
“क्या हुआ परवेज़? क्या दिखा रहा है तू मुझे?” रोहन यहां वहां देखकर बोला.
“आबे अंधे वो देख कौन है.” परवेज़ अपनी उंगली से एक तरफ इशारा करता हुआ कहने….

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