शालिनी की चुदाई – Chudai Hindi Stories

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शालिनी की चुदाई – Chudai Hindi Stories

मेरा नाम शालिनी है. मैं 38 साल की डिवोर्स्ड लेडी हूँ और मेरे दो बच्चे हैं एक बेटा और बेटी. हलकी मैं देखने में 30 से ज्यादा की नहीं लगती और मुझे देख के कोई कह भी नहीं सकता की मैं 20 साल की बेटी की मां हूँ क्योंकि मेरी शादी कम उमर में ही हो गयी थी. कुच्छ साल पहले मेरा डाइवोर्स हो गया तब से मैं अपने बच्चों के साथ रही रही हूँ और एक स्कूल में टीचर के[/कलर]ई नौकरी करती हूँ. स्कूल एक पवत् स्कूल है. स्कूल में एक पिओन मनोज है जो की काफी यंग और हॅंडसम है उसकी कोई अच्छी जगह नौकरी नहीं लगी तभी वो यहाँ नौकरी करता है. वो यंग और हॅंडसम है इस वजह से मैं भी उसे पसंद करती हूँ, वो अक्सर मुझे घूरा करता है. मैं स्कूल में सारी पहन के जाती हूँ, जब भी वो पिओन मेरे पास आता था तो उसकी निगाहें मेरे बूब्स पे या गांड पे ही या कमर पे रहती थी पर मैं भी उसे पसंद करती थी इसलिए मुझे उसका घूर्ना बुरा नहीं लगता था. और मैं भी कभी कभी अपना पल्लू गिरा देती थी जिससे उसे मेरे बूब्स के थोड़े दर्शन हो जाते थे. अब हम थोड़ा बातें भी करने लगे थे.

उसने मुझे बताओ बताओ में ही बताया की वो पास के गाँव में एक झोपड़ी में रहता है और वो वहाँ अकेला ही रहता है. उसने मुझे अपने घर बुलाया भी. मैं किसी गाँव नहीं गयी थी तो मैंने भी हाँ कह दी और एक दिन स्कूल के बाद मैं उसके साथ उसके घर आई. हमने मछली पाकरने का प्रोग्राम बनाया था, उसके घर के पास ही एक तलब था. हम दोनों उसे तलब के किनारे बैठ के मच्हली पाकरने लगे और बातें भी कर रहे थे. मैंने अपनी सारी का पल्लू जान बुझ के नीचे गिरा दिया था जिससे उसे मेरी क्लीवेज दिख रही थी और उसकी निगाहें वही पे थी. वहाँ आस पास और कोई नहीं था मैंने उससे कहा की मैं कभी तलब में नहीं नहाई हूँ और मुझे तलब में नहाना है क्योंकि गर्मी भी लग रही है.

तो उसने कहा ठीक है आप नहा लीजिए यही. मैंने उससे कहा अगर मैं सारी पहन के नहाओगी तो ये भीग जाएगी. तो उसने कहा ” अरे सारी पहन के नहाने की क्या जरूरत है वैसे भी आस पास कोई नहीं है आप सारी उतार दीजिए और मैं आपको एक धोती दे देता हूँ जिसे लपेट के नहा लीजिए तो आपकी सारी भी नहीं भीग़ेगी”. ये कह के वो अपने घर से एक धोती ले आया, मैं झाड़ियो के किनारे गयी और सारी ब्लाउज पेटीकोट और ब्रा उतार दी मैंने पैंटी नहीं पहनी थी. सारे कपड़े उतार के मैंने बदन पे धोती लपेट ली और उसके सामने गयी. मुझे थोड़ी शर्म भी आ रही थी क्योंकि धोती से मेरी जांघें और कंधे पूरे खुले थे. पहली बार मैं इतने कम कपड़े में किसी पराए मर्द के सामने थी. पर सच तो ये था की तलाक के बाद मैंने किसी से सेक्स नहीं किया था इस वजह से मैं सेक्स की आग में जल रही थी. और मुझे पराए मर्द को जिस्म दिखाने में मजा आ रहा था. खैर मैं तलब में उतरी और डुबकी लगाई और तैरने लगी. धोती के गीले होने की वजह से मेरा पूरा जिस्म झलक रहा था. मेरे बूब्स, निप्पल, गांड सब कुच्छ धोती के गीले होने की वजह से साफ झलक रहे थे. खैर फिर मैं नहा के तलब से नीलकी, अब तक मनोज(पिओन) भी कई मच्चलिया पकड़ चुका था.

वो मेरे जिस्म को घूर रहा था. मैंने उसके साथ उसकी झोपड़ी में आ गयी, मेरे बदन पूरा गीला था और सब कुच्छ जालक रहा था मैंने उससे टावल माँगी, उसने मुझे ट्वेल देदी और वो बाहर तलब के किनारे रखे मेरे कपड़े उठाने चला गया. मैं टावल से अपने बाल सूखने लगी, वो मेरे कपड़े उठा लाया पर मैं अभी भी गीली धोती लपेटे थी और बाल सूखा रही थी. उसने मुझसे कहा-”मैडम ये गीली धोती क्यों लपेटे हैं इससे उतार दीजिए, मैं आपके कपड़े उठा लाया हूँ आप चेंज कर लीजिए मैं बाहर चला जाता हूँ”. ये सुन के मैंने कहा-”अरे मनोज तुम क्यों बाहर जाओगे मैं यही चेंज कर लेती हूँ”. ये कह के मैं धोती उतार दी, अब मैं एक पराए मर्द के सामने एक-दम नंगी खड़ी थी. मनोज मुझे नंगी देख कर खुद पे काबू नहीं रख सका और उसने मुझे अपनी बाँहों में भर लिया, मैं भी तो यही चाहती थी क्योंकि मैं भी सेक्स की आग में जल रही थी. मैंने मनोज की लूँगी उतार दी और उसकी आंडरवेयर भी उतार दी. अब हम दोनों एक दम नंगे थे और एक दूसरे को किस कर रहे थे, उसके हाथ मेरे जिस्म के उभारो पर घूम रहे थे और मेरी पीठ और गांड पे उसके हाथ मुझे और भी उत्तेजित कर रहे थे. मैं भी मनोज के नंगे जिस्म का अपने हाथों से जायज़ा ले रही थी, मेरे हाथ कभी उसकी पीठ पे जाते, कभी लंड पे और कभी उसकी गांड पे कभी सीन पे. हम दोनों एक दूसरे को बेतहाशा किस कर रहे थे उसकी जीभ मेरे मुंह में थी और मैं इससे बच्चों की तरह चूस रही.

हम दोनों एक दूसरे से काश के गले लगे हुए थे. अब हम दोनों के मुंह अलग हुए और उसने मेरे बूब्स को दबाना शुरू किया मैंने भी उसका लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी. फिर वो बेड पे बैठा और मैं उसकी गोद में बैठ गयी जिससे उसका लंड मेरी चुत में घुस गया. अफ कितने दीनों बाद मेरी चुत में लंड घुसा था, मैं उसकी गोद में बैठी थी और धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थी जिससे लंड अंदर बाहर हो रहा था. उसके हाथ मेरे बूब्स पे थे और वो मेरे बूब्स दबा रहा था और मैं धीरे उछल रही थी.

अब उसने मुझे बेड पे लिटा दिया और मेरी टांगों के बीच में आ गया और मेरी चुत चाटने लगा. मेरे मुंह से उफफफफफफफ्फ़ इसस्स्स्सस्स की आवाजें निकल रही थी और मैं उसके सर को अपनी चुत पे दबा रही थी. वो अपनी जीभ मेरी चुत पे फेयर रहा था और अंदर भी डाल रहा था. अब वो मेरे ऊपर छज्जे गया उसका लंड मेरी चुत से सटा हुआ था और वो मेरे बूब्स चूस रहा था मैं उसका लंड अपने चुत में लेने को बेकरार थी. उसने अपना लंड मेरी चुत के ऊपर रखा और फेरा मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैंने उसका लंड पकड़ के अपनी चुत के अंदर कर दिया और अब वो झटके लगाने लगा.वो मेरे ऊपर चारा हुआ था और तेजी से झटके लगा रहा था, उसके हाथ मेरे बूब्स पे थे और वो बूब्स दबा भी रहा था. मैं अपनी चुत में उसके तगड़े लंड के मजे ले रही थी और मेरे मुंह से बस सिसकियां ही ँकल रही थी. मनोज ने भी लंड अंदर बाहर की बढ़ता बड़ा दी. थोड़ी देर बाद वो रुका और उसने मुझे डॉगी पोज़ में आने को कहा, मैं डॉगी पोज़ में आ गयी और वो पीछे से मेरी गांड और चुत चाटने लगा उसके चाटने से मेरी उत्तेजना और भी बार रही थी. मनोज बोला-” अफ शालिनी तुम्हें कब से चोदना चाह रहा था क्या गांड है तुम्हारी क्या चुत है क्या बूब्स है, हर चीज़ मस्त है मेरा लंड बहुत सालों से प्यासा था”.

ये सुन के मैं बोली-”मनोज मैं भी प्यासी थी और तुम्हारा लंड मेरी प्यास बुझा रहा है, तुम कितने अच्छे से कर रहे हो, मेरे पति ने कभी मेरे साथ इतना अच्छा सेक्स नहीं किया”. मनोज बोला-”अच्छा हुआ तुम्हारा डाइवोर्स हो गया”. फिर मनोज ने मेरी चुत में उंगली घुसॉद दी और गांड के छेद को चाटने लगा. मैं डॉगी पोज़ बहुत मजे से चटवा रही, मेरे पूर्व पति चाटना और चूसना ज्यादा पसंद नहीं करते थे और उन्होंने मेरे साथ कभी ये सब किया भी नहीं था इसलिए ये पहली बार था जब मैं चुस्वाई और चटवाने का आनंद ले रही थी. फिर मनोज ने मेरी चुत पे अपना लंड रखा और डाल दिया और मैं डॉगी पोज़ में चुद रही थी. मनोज के हाथ मेरी गांड पे थे और वो तेजी से लंड मेरी चुत के अंदर बाहर कर रहा था. मैं भी चरम आनंद पे थी इस चुदाई में तीसरी बार मेरी चुत में मनोज का लंड घुसा था और मैं चाहती थी की इस बार ये मेरी चुत में फारिग होकर ही निकले. उसके तेज स्ट्रोक्स से मेरी चुत भी रस चोद चुकी थी और मनोज ने भी मेरी चुत में अपना पानी छोड़ दिया और लंड बाहर निकाला. फिर उसने एक कपड़े से मेरी चुत और अपना लंड पोंछ दिया. अब वो लेट गया और मुझसे लंड चूसने के लिए कहने लगा. मैंने उसका लंड अपने मुंह में लिया और चूसने लगी उसका लंड अभी भी खड़ा था.

मैं उसके लंड पे अपनी जीभ फेयर रही थी, उसने भी मेरी चूची अपने मुंह में ले ली और चूसने लगा. मैं उसकी चुदाई से संतुष्ता हो चुकी थी पर शायद उसका एक और राउंड लगाने का मन था पर अब वो मेरी गांड मारना चाहता था. उसने मुझसे कहा ”गांड मरावगी”. मैंने कहा ”ठीक है” हलकी मैंने इससे पहले कभी गांड नहीं मरवाई थी. उसने मुझे पेट के बाल लेटने को कहा, उसने मेरी गांड थोड़ी फैलाई और गांड के छेद पे एक क्रीम लगा दी और अपने लंड पे भी क्रीम लगा ली. फिर उसने अपना लंड मेरी गांड के अंदर डाला टाइट छेद होने की वजह से उसका लंबा मोटा लंड मेरी गांड में ज्यादा घुस नहीं पाया पर क्रीम लगाने से ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. अब उसने मुझे फिर से डॉगी पोज़ में आने को कहा ताकि गांड चोदने में आसानी हो तो मैं डॉगी पोज़ में आ गयी और वो धीरे धीरे लंड मेरी गांड के छेद के अंदर बाहर करने लगा. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद उसने बढ़ता बड़ा दी और जब पानी निकालने वाला था तो लंड बाहर निकल लिया और मेरी गांड पे अपना पानी गिरा दिया. अब मैं पस्त होकर लेती गयी वो भी मुझसे चिपक के लेट गया और हम सो गये. दो घंटे बाद करीब 4 बजे मेरी आँख खुली जब बेटे का फोन आया था. मुझे लोटने में देर हो गयी थी इस वजह से वो पुच्छ रहा था की मैं कब तक लौटूँगी.

मैंने उसे बता दिया की थोड़ा जरूरी काम है लौटने में टाइम लग जाएगा तुम फिक्र ना करो. कॉल आने की वजह से मनोज भी जब गया था. बेटे से हलकी मैं फोन पे बात कर रही थी पर मुझे बात करते हुए मुझे थोड़ी शर्म भी आ रही थी क्योंकि मैं एक दम नंगी थी और पराए मर्द के साथ थी. मनोज के हाथ मेरे हिप्स और बूब्स पे थे और उसका लंड आराम से सो रहा था. मैं पहले नहा चुकी थी पर मनोज ने मेरी गांड पे पानी निकाला था और मेरी चुत भी थोड़ी गंदी हो गयी थी इसलिए मैंने सोचा की मुझे फिर से नहा लेना चाहिए. मैंने मनोज से कहा-”मनोज मुझे फिर से तलब में नहाना है”. मनोज-”ठीक है शालिनी जाओ नहा लो अभी आस पास कोई नहीं होगा”. मैं उठी और नंगी ही उसके घर के बाहर आ गयी आस पास कोई भी नहीं था और सन्नाटा था, मैं तलब में चली गयी और नहाने लगी. मनोज लूँगी लपेट कर बाहर आ गया. मैं नहा के निकली और उसके गले लग गयी और हम किस करने लगे. फिर हम अंदर आ गये और उसने टावल से मेरे गीला बदन पोच्छा और मैंने कपड़े पहन लिए और वो मुझे रोड़े तक चोद आया जहाँ से बस पकड़ के मैं अपने घर आ गयी

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