कच्ची शराब और देसी चाची

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कच्ची शराब और देसी चाची

दोस्तों मैं गाँव में मुखिया जी का ड्राइवर था. मुखिया जी की चाची जी काफी आक्टिव महिला थी, मेरी सॅलरी वही देती थी, मुझे कहा भेजना है गाड़ी लेकर वही डिसाइड करती थी. बसंत यहां चले जाओ बसंत वहां चले जाओ. पता नहीं इस देसी चाची के दिमाग में क्या फितूर भरा था. वैसे मेरी कल्लां चाची बिलकुल देसी चाची थी, मस्त बारे बारे दूध से भरे हुए बूब्स, बड़ी बड़ी इंडियन गांड और पतली कमर पर जब वो फेटा काश के शादी बँधती तो मेरा लंड उसको पीचे से मटक मटक के चेलते हुए देख कर खड़ा हो जाता. फिर भी मैं क्या करता, कंट्रोल करता था.

एक दिन मैं रात को गाड़ी लेकर के शहर से आया. मैं जब चाभी देने देसी चाची कल्लां के यहां गया तो वो बाहर आई, उसका पल्लू ढालका हुआ था, शायद चाचा भी घर में नहीं थे. उसने कहा बसंत इतनी रात को अपने गाओ जाने में खतरा है, यही सो जाओ मेरे घर में ही.

घर में मैं और देसी चाची, थे बस. मैंने कच्ची शराब पी हुई थी, मैं वैसे भी रिस्क लेने के हालत में था. मैंने पगड़ी बँधी और चाची के ऊपर जा कर चढ़ गया. इससे पहले की चाची कुच्छ बोलती मैंने उनके कान में कहा चाची आप बहुत खूबसूरत हो, मैं आप पर मरता हूँ आपके लिए कुच्छ भी कर सकता हूँ आपके एक इशारे पर जान दे सकता हूँ. इतने गबरू नौजवान लोंडे को ये कहते सुन चाची का दिल पासिज़ गया. उसने अपनी पेटी कोट ऊपर उठा दी. उसकी झतो वाली चुत में मैंने अपना लंड डाल दिया. और उसके बारे बारे चुच्चे दबाने लगा. देसी चाची कह रही थी, बसंत देखना तुम्हारे जैसे मेरे लड़के है कभी ये बात किसी से कह मत देना, उन्हें क्या पता था की मैंने अपना मोबाइल का कमरा ऑन कर के साइड में रिकार्डिंग के लिए रख दिया है.

कच्ची शराब और देसी चाची

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