मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 48

0
559

थी & कॉलेज जाने वाले लड़के-लड़की यहां कपड़े खरीदने के लिया खूब आते थे.सलोनी 1 दुकान में टाँगे 1 स्कर्ट को देख रही थी.

“ही!”,वो चौंक के घूमी.

“प्रणव..तुम यहां?”,उसके चेहरे पे हया की सुर्खी आई & फिर उसने आवाज़ थोड़ी धीमी की,”..तुम तो पूरा दिन बिज़ी रहने वाले थे?”,वो स्कर्ट को हाथों में ले देख रही थी,”..उन..नहीं..वो दिखाओ..उधर ऊपर जो तंगी है..”,उसने दाएँ हाथ को ऊपर उठाकर इशारा किया & ऐसा करने से उसकी कंज़ी थोड़ा उचक गयी & उसकी गोरी कमर नुमाया हो गयी.

“वो तो तुम्हें छेद रहा था.”,प्रणव उसके पीछे खड़ा था & उसका दया हाथ सलोनी की कमर से आ लगा था लेकिन इस तरह की दुकानदार को ना दिखे,”..वरना मेरी ऐसी मजाल की तुम्हारी खदिमात से पहले कंपनी की खिदमत करूं!”,उसने वहां के माँस को दबाया तो सलोनी की चुत कसक उठी & उसने बड़ी मुश्किल से अपनी आ को दबाया.

“वो भी दिखना..”,सलोनी ने दुकानदार को दूसरी तरफ तंगी स्कर्ट दिखाई & फिर उसके घूमते ही प्रणव का हाथ कमर से नीचे करते हुए घबरा के देखा,”..क्या कर रहे हो?..किसी ने देख लिया तो?”

“तो..क्या कह दूँगा की मेरी महबूबा है!”,प्रणव फुसफुसाया & दुकानदार के घूमने से पहले कमर को ज़ोर से दबा के हाथ पीछे खींचा.

“ये दोनों दे दो.”,सलोनी ने स्कर्ट्स चुन ली तो प्रणव ने उनके पैसे दे दिए & फिर दोनों बाहर निकल आए.बाज़ार म्यू भीड़ पल-2 तरफ रही थी.प्रणव सलोनी के भाई तरफ चल रहा था & भीड़ में सो रास्ता दिखाने का बहाने बार-2 उसकी पीठ या कमर छू रहा था.सलोनी को उसके हाथों का एहसास मस्त कर रहा था.देखे जाने का डर,महबूब का साथ..ये बातें उसके जिस्म को जगा रही थी.मगर पकड़े जाने का डर बहुत था वहां.1 तो इतने बारे खंडन की बहू ऐसे आम लोगों के बाज़ार में शॉपिंग कर रही थी,ऊपर से किसी ने गर्अ उसके नंदोई को उसके जिस्म को चोदते देख लिया तो बहुत बड़ा स्कॅंडल हो सकता था.विक्की वाले हादसे के बाद लोग सलोनी को भी पहचानने लगे थे.सलोनी 1 विदेशी लाइनाये ब्रांड के शोरुम में घुस गयी,ये सोचते हुए की प्रणव तो वहां आ नहीं पाएगा & बड़ा मजा आएगा उसकी शक्ल उस वक्त देखने में!

मगर प्रणव की केमिस्ट्री उसका पूरा साथ दे रही थी.उस ब्रांड ने हाल हे में मर्दों की रंगे भी निकली थी सो वो अपनी सलहज के पीछे-2 अनद्र घुसा & में’से सेक्षन में चला गया.दोनों स्टोर में घूम-2 के समान देखने लगे.सलोनी 1 शेल्फ के पास आई,पुतलो पे लगी ब्रा & पैंटी अलग-2 साइज़स में उनके बगल में रखे शेल्व्स पे भी थी & हर पुतले के बगल में 1 शीशा लगा था.सलोनी ने 1 ब्रा उठाया & उसे देखने लगी.

वो जहां ब्रा देख रही थी,उसके ठीक उल्टी दिशा में प्रणव 1 आंडरवेयर देख र्था & वहां भी वैसा ही 1 शीशा लगा था.उसने शीशे में देखा & उसे सामने के शीशे में देखती उस से नज़रे मिलती सलोनी दिखी.सलोनी ने ब्रा उठाकर अपने सीने के सामने की तो प्रणव ने हौले से सर हिला के मना का दिया.वो आगे बढ़ी तो वो भी आगे बढ़ा & इस बार की ब्रा पसंद आने पे उसने आ में सर हिलाया.सलोनी मुस्कराई,उसे इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था.दोनों प्रेमी 1 दूसरे से अलग-थलग ,1 दूसरे की ओर पीठ किए भी रोमांस कर रहे थे.उसने उसी तरह प्रणव को भी आंडरवेयर चुनवाया & फिर अपना बिल अदा कर वहां से निकल के आगे तरफ गयी.कुच्छ देर बाद प्रणव भी वहां से निकला & फिर तेजी से चलता हुआ उसके साथ हो लिया.सलोनी की चुत अब रिसने लगी थी.

1 जगह बहुत भीड़ थी & प्रणव ने उसका फायदा उठाते हुए उसकी कमर से हाथ उसकी गांड पे सरका दिया & उसे दबा कर हाथ फौरन पीछे खींचा.सलोनी चिहुनकि & थोड़ा आगे हुई तो प्रणव उसके बिलकुल पीछे आ गया & उसके कंधों पे हल्के से हाथ रख थोड़ा आगे हुआ & अपना लंड उसकी गांड से सटा दिया.स्कर्ट,पैंटी & प्रणव की पेंट & आंडरवेयर के बावजूद सलोनी को उसके मर्दाने अंग की जलन महसूस हुई & उसकी चुत कसमसा उठी.सलोनी थोड़ा आगे बढ़ी & 1 आत्म में घुस गयी.उसके पीछे प्रणव भी वहां आ गया.आत्म कार्ड से खुलता था & 1 बार कोई अंदर हो तो बाहर से वो खिल नहीं सकता था.प्रणव ने 1 बार शीश एक दरवाजे से बाहर्ड़ेखा,कोई नहीं था..उसने अपनी सलहज को खींच के शीशे के दरवाजे के बगल की दीवार से सटा दिया.

“नहीं..प्रणव..कोई आ जेगे..!”,सलोनी की आंखें जिस्म के नशे से भारी हुई थी.प्रणव ने उसकी दोनों कलाइयाँ पकड़ के उसके सर के दोनों तरफ दीवार से लगाया & उसके बाए कान में जीभ फिरने लगा.सलोनी ने मस्ती में आंखें बदन कर ली.प्रणव आगे हो उसकी चुत पे अपना लंड दबा रहा था.उसके होंठ अब उसकी गर्दन को चूमते हुए उसके च्चेरे पी आए & सलोनी ने फौरन उसके होठों को अपने होठों में भींच उसकी जुबान को चूस लिया.उसके जिस्म की कसक बहुत तरफ गयी थी.वो अपनी कमर हिलाकर प्रणव के लंड पे जवाबी धक्के दे रही थी.प्रणव ने उसकी कलाइयाँ छोड़ी & उसकी शर्ट में हाथ घुसा उसकी कमर मसलने लगा.सलोनी तेजी से कमर हिला रही थी..बस कुच्छ देर &..प्रणव ने लंड & ज़ोर से उसकी चुत पे दबाया..”..उउन्न्ञनननणणन्..!”,सलोनी ने बड़ी मुश्किल से अपनी आ को प्रणव के होठों में दफ़्न किया & उसका जिस्म झटके खाने लगा.प्रणव ने झड़ती हुई सलोनी को थाम लिया.कुच्छ पल बाद जब खुमारी उतरी तो दोनों अलग हुए & सावधानी से बाहर निकल गये.सलोनी के दिल में अब चुदाई की हसरत जगह गयी थी.उसका दिल कर रहा था की प्रणव उसे कही ले चले जहां दोनों इत्मीनान से 1 दूसरे में खो सकें & वो अपनी आग बुझा पाए.

“अरे..सलोनी जल्दी इधर कोने में आओ!”,प्रणव ने धीमे मगर अर्जेंट लहजे में कहा तो सलोनी उसके पीछे 1 पतले से रास्ते पे चली गयी.

“क्या हुआ?”

“शिप्रा घूम रही है यहां &..”,उसने मूंड़ के देखा,”..& इधर ही आ रही है.”,दोनों तेजी से निकले & खुले में आ गये.प्रणव ने इधर-उधर देखा & उसे सामने पार्किंग के पार मल्टिपलेक्स नज़र आया,”..वहां सिनेमा हॉल पे चलो.जल्दी!”,सलोनी तेज कदमों से उधर गयी तो प्रणव उस से लगा हो कही गायब हो गया मगर जब सलोनी सिनेमा….

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here