मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 49

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हॉल तक पहुंची तो उसने देखा की प्रणव टिकट काउंटर से टिकट खरीद के खड़ा है.

“ये टिकट लो & अंदर जाओ.”,सलोनी हॉल में पहुँची तो देखा की प्रणव भी पीछे से आ रहा है.दोनों अलग-2 हॉल के अंदर अपनी सीट्स पे पहुँचे,”बच गये.”,लाइट्स बंद होते ही प्रणव फुशफुसाया.कोई बकवास फिल्म थी & हॉल लगभग खाली था.सिर्फ़ चाँद जोड़े वहां कुच्छ निजी पल चुराने वहां बैठे थे.प्रणव ने सबसे पीछे की किनारे की सीट्स की टिकेट्स लिट ही & उनकी रो में 1 जोड़ा बैठा था मगर दूसरे कोने पे.

“सब तुम्हारी वजह से.क्या जरूरत थी ऐसे मेरे पीछे-2 बाज़ार में आने की?”,सलोनी ने उसे झिड़का तो प्रणव ने सीट्स के बीच के हटता उठाया & अपनी भाई बाँह केग हियर में उसे लेकर उसका गाल चूम लिया.”..ओफ्फो,अब यहां भी शुरू हो गये!..उउन्न्ञणणनह..!”,सलोनी ने उसकी बाह से छूटने की कोशिश की लेकिन प्रणव की पकड़ बहुत मज़बूत थी.

“गलती मेरी नहीं,तुम्हारी है!”,प्रणव उसकी जुबान से खेलने के बाद उसकी शर्ट में दया हाथ घुसा के उसकी कमर को सहला रहा था,”..इतनी हसीना क्यों हो की बस तुम्हारे करीब रहने का दिल करता है!”,उसका हाथ कमर से स्मने पेट पी आ गया & उसकी नाभि को छेड़ने लगा.

“हटो झूठे..ओह..!”,सलोनी तारीफ सुन के मुस्कराई & उसके दाएँ कंधे को थाम लिया,”..बस मुझे बहलाने को बातें बना रहे हो..नाआ!”,प्रणव उसकी नाभि को छेद रहा था & उसकी चुत में फिर से कसक होने लगी थी.

“झूठ बोलू तो अभी मर जाऊं!”,प्रणव का हाथ उसकी नाभि से सरक के उसकी पीठ पी आ गया था & उसने उसे सीने से चिपका के उसकी छातियों को अपने से भींचते हुए चूमना शुरू कर दिया.सलोनी भी पूरी गर्मजोशी से उसका साथ देने लगी.पता नहीं कितनी देर तक दोनों 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेलते रहे.प्रणव के हाथ उसकी कमीज़ के कसे होने की वजह से ज्यादा ऊपर नहीं जा पा रहे थे & वो बस उसकी मांसल कमर को मसला के ही अपने को बहला रहा था.

“आ..नहीं..कोई देख लेगा,प्रणव!..ऊहह..!”,प्रणव ने हाथ वापस सामने ला कर उसकी स्कर्ट में आगे से घुसा दिया था & उसकी पैंटी टटोल रहा था,”..नाआअ..!”,सलोनी उसका हाथ पकड़ के खींच रही थी लेकिन प्रणव ने हाथ अंदर घुसा ही दिया था.सलोनी ने शर्म & मस्ती से आहट हो अपना सर उसके बाए कंधे पे रख दिया & च्चेरे गर्दन & कंधे के मिलने वाली जगह में छुपा उसकी गर्दन को चूमने लगी.प्रणव की उंगलियां उसकी चुत को सहलाते हुए अंदर घुसी & उसे रगड़ने लगी.सलोनी कसमसाते हुए सीट पे ही छटपटाने लगी.प्रणव उसके बाए कान को जीभ से चोदते,उसके गाल को चाटते हुए उसकी चुत मर रहा था.

“उउन्नगज्गघह..!”,सलोनी ने उसकी गर्दन के नीचे अपने दाँत गड़ाए & अपने दाएँ हाथ को उसकी पीठ से ले जाते हुए प्रणव के दाएँ कंधे को भींचा & बाए को उसकी शर्ट के अंदर घुसा उसकी छाती में नाखून धंसा दिए & झड़ने लगी.उसका जिस्म थरथरा रहा था.प्रणव उसके चेहरे को हौले-2 चूमते हुए बाए हाथ से उसकी पीठ सहलाता रहा.

सलोनी संभल्की तो उसने चेहरा प्रणव के कंधे पे रखे-2 ही ऊपर घूमकर उसे देखा तो प्रणव ने उसके रस से भीगी अपनी उंगलियां उसकी स्कर्ट से निकली & उसे दिखाते हुए उन्हें मुँह में भर उसका रस चाट लिया.सलोनी ने बाए हाथ से उसके बालों को पकड़ते हुए चुके सर को घुसाया & चूमने लगी.

प्रणव ने चूमने के बाद उसका हाथ अपने लंड पे रख दिया.सलोनी ने इधर-उधर देखा & उसकी ज़िप खोल दी & हाथ अंदर घुसा नूंदरवेार के ुआप्र से ही उसके लंड को सहलाने लगी & अपने प्रेमी को चूमने लगी.प्रणव ने उसके हाथ को अपने आंडरवेयर पे & दबाया & फिर आंडरवेयर नीचे कर लंड को बहरा निकल उसे अपनी महबूबा के हाथ में दे दिया.

“पागल हो क्या!..कोई देख लेगा..!”,सलोनी घबरा के बोली मगर उसे मजा भी आ रहा था.

“कोई नहीं देखेगा.”,प्रणव ने उसके हाथ को लंड पे & दबाया तो वो उसे बाए हाथ से हिलने लगी.प्रणव उसकिश्िर्त के बटन्स खोलने लगा.

“नहीं!बिलकुल नहीं!”,सलोनी ने लंड छोड दूर होने की कोशिश की तो प्रणव ने फिर से लंड को उसे थमा दिया.

“बस 2 बटन्स खोल रहा हूँ,जान!घबरा मत.”,उसने अपना दया हाथ अंदर घुसा उसकी छातियों को ब्रा के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया.कुच्छ देर बाद सलोनी ने देखा की कोई उनकी ओर ध्यान नहीं दे रहा तो वो थोड़ा सायंत हुई & लंड ज़ोर-2 से हिलने लगी.अब प्रणव के छटपटाने की बड़ी थी.उसने हाथ सलोनी के सीने से हटाया & उसका सर पकड़ के नीचे किया तो सलोनी उसके ऐशारा समझ गयी & फिर मना किया.

“प्लीज़..कोई नाहिद एख रहा..बस तुरंत हो अज़एगा..प्लेसाए मेरी जान!”,दिल तो सलोनी का भी कर रहा था & प्रणव के इसरार ने उसे थोड़ा पिघला भी दिया.उसने फिर इधर-उधर देखा & जल्दी से नीचे झुक अपने महबूब का लंड मुँह में भर लिया.उसने उसे हिलना नहीं छोडा था & साथ में चूसना भी शुरू कर दिया था.थोड़ी ही देर में प्रणव सीट पे अपने कुहाकने को रोकने की कोशिश कर रहा था & सलोनी का मुँह उसके लंड पे & दब रहा था.सलोनी उसके अंदो को भिंचे हुए तो & उसकी जुबान जिसने प्रणव के सुपाडे को खूब छेड़ा था अब उसके वीर्य को चख रही थी.सलोनी उसके अंदो को ऐसे दबा रही थी जैसे उन्हें दबा के वीर्य की सारी बूंदें निकल लेना चाहती हो.उसकी जुबान जल्दी-2 सारे वीर्य को अपने हलक में उतार रही थी.कुच्छ पल बाद उसने पराँव की गोद से सर उठाकर उसकी निगाहों में झाँका तो उसे वो उसका शुक्रिया अदा करती दिखी.प्रणव ने उसके शर्ट के बटन्स लगाए तो सुने भी उसके लंड को अंदर डाल उसकी पेंट की ज़िप चढ़ा दी & फिर उसके अकनध्े पे सर रख उसकी बाँहों में कैद हो आंखें बंद किए सुकून के एहसास का कलुत्फ उठाने लगी.

सलोनी ने अपने पास रखे सुमित्रा के थोड़े से समान को शण मारा था लेकिन उसके हाथ कुच्छ नहीं लगा था.उसने देवेन को ये बात बताई थी.उसका कहना था की शायद गोपालपुर जाकर फिर से नये सिरे से खोज करने से दयाल के बारे में कुच्छ जानकारी मिल सके मगर सलोनी उसकी इस बात से सहमत नहीं थी.उसका मना था की दयाल जैसा लोमड़ी की तरह का चालक & शातिर….

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