मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 50

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शख्स ने अपने पीछे कोई निशान नहीं छोडा होगा.

“तो क्या करे?”,देवेन थोड़ा झल्ला गया था.

“मुझसे मिलिए तो साथ बैठ के कुच्छ सोचते हैं.”

“ठीक है.मेरे होटल आ जाओ.”,सलोनी शाम को उसके होटल के कमरे में बैठी थी.उसने घुटनों तक की कसी,भूरी स्कर्ट & 1धारियो वाली पूरे बाज़ू की क्रीम शर्ट पहनी थी.पैरों में हाई हील वाले जुटे थे & जब उसने देवेन के कमरे में कदम रखा तो उसकी नज़रो में दिखी उसके जिस्म की तारीफ सलोनी से छुपी नहीं रही थी मगर अगले ही पल देवेन की नज़रे फिर से पहले जैसी हो गयी थी जिन्हें सलोनी के हुस्न से कोई मतलब नहीं था.सलोनी को उसका उसकी सुंदरता को निहरना बहुत अच्छा लगा था लेकिन जब उसकी निगाहें अपने पहले वाले अंदाज़ में आ गयी तो वो अंदर से थोड़ी मायूस हो गयी थी.

“क्या सोच रही हो?”,वो उसके सामने चाय बनकर प्याला बढ़ाए उसे देख रहा था.

“कुच्छ नहीं.”,धीमी आवाज़ में जवाब दे सलोनी ने कप लिया.उसके दिल में इस शख्स के लिए 1 जगह बन गयी थी लेकिन कैसी ये उसकी समझ में अभी नहीं आ रहा था,”दयाल को जाने वाले क्या बहुत लोग थे गोपालपुर में?..आपकी मुलाकात कैसे हुई थी?..& आपने कहा था की आपको ये पता था की वो कुच्छ गलत करता था लेकिन पूरी तरह से मालूम नहीं था तो ये बताइए की क्या पता था आपको उसके बारे में?”

“बाप रे!तुमने तो सवालों की झड़ी लगा दी.”,देवेन हंसा & चाय का घूँट भरा.सलोनी को उसकी हँसती सूरत अच्छी लगी & अपने बचपाने पे थोड़ी शर्म भी आई.देवेन उसके सुर्ख गुलाबी चेहरे को देखने लगा..
“मेरी मुलाकात दयाल से उसी लोंज में हुई थी जहां मैं रहता था.वैसे तो वो अपने काम से काम रखता था..”,उसकी निगाह उसकी गोरी,सुडौल टांगों पे पड़ी .

“हाँ या फिर वो कभी-कभार शहर से कुच्छ समान ला कर गोपालपुर में बेचता था जैसे कपड़े या जूते मगर 1 बात थी.वो कभी-कभार बिना बताए अचानक चला जाता था & जब लौटता था तो उन्हीं सामानो के साथ जिन्हें वो बेचने को लाता था.लोंज के मलिक ने 1 बार मुझे कहा था की मैं उसके साथ ज्यादा ना घुलु क्योंकि उसे वो ठीक आदमी नहीं लगता था.मैंने हंस के बात टाल दी थी.अगर पता होता तो..”

“खैर..वो इतना समान लाता था की 3-4 दिन में बिक जाए & 1 बात & थी.मैंने उसे वो समान बेचने के लिए बहुत परेशान होते या फिर उसका प्रचार करते उसे नहीं देखा.आमतौर पे कैसा भी कारोबारी हो,अपने धंधे को बढ़ने के लिए वो ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल उन्हें उसके बारे में बताना चाहता है लेकिन दयाल ऐसा नहीं करता था.”

“यानि की वो ये सब बस दिखावे के लिए करता था.”,..लड़की खूबसूरत होने के साथ तेज भी थी..अगर सुमित्रा सच में मेरे बाप की तरह दयाल की चाल की शिकार बनी तब तो ये मां पे बिलकुल नहीं गयी है & नहीं तो फिर ये अपनी मां की ही बेटी है,”..मुझे तो यही लगता है की शुरू में तो उसने दोस्ती बस इसीलिए रखी थी ताकि कोई तो ऐसा हो जो उसे कस्बे के बारे में & किसी भी नयी खबर के बारे में बताता रहे.अपने छोटे-मोटे कामों के बारे में बता या यू कहे की अपने कुच्छ मामूली से ‘राज़’ बता के उसने भरोसा जीता & बाद में जब मौका मिला तो उसने आपके बाप फँसा दिया.देखिए,जिस तरह से आप पकड़े गये थे,उस से तो यही लगता है की दयाल को भनक लग गयी थी की पुलिस उसके लिए जाल बिछा रही है & उसने चालाकी से अपनी जगह उसमें आपको फँसा दिया.”

“हूँ..तो अब क्या कहन्ना है तुम्हारा..उसे कैसे ढूंडे?”

“जो तस्वीर आपके पास है वो बहुत पुरानी & खराब भी हो गयी है.बस अंदाज़ा भर लग पता है उसकी शक्लोसुरत का.”,सलोनी सोचने लगी.उसे उस कमीने दयाल को ढूनदना ही था जिसकी वजह से उसकी मां की जिंदगी में खुशियाँ आने से पहले ही वापस लौट गयी..उस हरंखोर की वजह से उसकी मां की देवेन के बाप से शादी नहीं हुई..अगर वैसा हुआ होता तो शायद आज वो भी ऐसी ना होती..कही बहुत सुकून से 1 आम लड़की की जिंदगी जी रही होती,”..उस जेल में काम करने वाले हवलदारो को नहीं खोज सकते क्या हम?..हो सकता है उन्हें कुच्छ पता हो उसके बारे में?”

“सलोनी..”,वो खड़ा हो गया,”..मैं तुम्हारे जज़्बात समझता हूँ लेकिन क्या तुम मेरा साथ दे पाएगी इस काम में?..तुम्हारी अपनी जिंदगी है..1 पति है..ऐसे में..-“

“-..अपनी मां का नाम बेदघ रखने से जरूरी & कोई काम नहीं मेरे लिए & इसके लिए मैं कोई भी कीमत चुकाने को तैयार हूँ.”

“हूँ..”,लड़की की सच्चाई पे उसे अब बिलकुल भी शुबहा नहीं था,”..ठीक है.मैं देखता हूँ की आगे क्या हो सकता है.”

“ठीक है तो मैं चलती हूँ.आप मुझे फोन कीजिएगा.”

“जरूर.”

“ओके,बायें!”,सलोनी को समझ नहीं आया की विदा कैसे ले & उसने अपना हाथ आगे कर दिया.देवेन ने उसका हाथ थमा & उस पल दोनों के जिस्मो में जैसे कुच्छ दौड़ गया & दोनों की मिली नज़रो ने दोनों के दिलों तक 1 दूसरे के 1 जैसे एहसास के महसूस होने की बात पहुँचा दी.

विक्की वापस आ गया था & उसका बदला रवैया बरकरार था.ऐसा नहीं था की वो सलोनी से बिलकुल ही बेरूख़् था लेकिन दोनों के रिश्तो में वो पहले जैसी चाहत,वो गर्मजोशी नहीं रही गयी थी.सलोनी को उसकी ये बात पसंद तो नहीं आ रही थी मगर उस से इस बात पे झगड़ वो बात बिगाड़ना नहीं चाहती थी.उसकी दुश्मनों ज़रूरतें तो प्रणव से पूरी हो रही थी & उसके दिमाग ने उसके पति को अपने काबू में रखने की तरकीबो के बारे में सोचना शुरू भी कर दिया था.

“विक्की..”,उसने उसे पीछे से बाँहों में भर लिया & उसके कुर्ते के ऊपर से ही उसके सीने पे नाखून चलाए & उसके दाएँ कंधे को चूम लिया,”..1 बात काहु?”

“हाँ.”,विक्की ने अलमारी में अपनी घड़ी रख के उसे बदन किया & घुमा तो सलोनी ने उसके गले में अपनी बाहे डाल दी.विक्की ने भी अपने हाथ उसकी कमर पे रख दिए.सलोनी आगे बढ़ी & उसके जिस्म से बिलकुल सात गयी.विक्की अपनी पत्नी से कितना भी बेरूख़् क्यों ना हो गया हो था तो वो 1 मर्द ही.सलोनी के कोमल जिस्म की हरारत ने उसके बदन की गर्मी भी बढ़ा दी & उसकी….

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