मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 52

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देखा की आख़िरकार फिल्म चुत कैसे होती है.

वही वो कामया से टकराई.कामया ने तो उस से गर्मजोशी से मुलाकात की लेकिन सलोनी ने उस से कोई खास बातचीत नहीं की.इसी चिड़िया के पर काटने के इरादे से तो वो यहां आई थी.उसने डाइरेक्टर से फिल्म के बारे में काफी तफ़सील से बात की & उसके पेन दिमाग ने भाँप लिया की अगर बस थोड़ी सी फेयर बदल की जाए रो साइड हीरोइन का रोल,जबकि कामया से ज्यादा अच्छी अदाकारा थी,थोड़ा सा बढ़ाया जाए तो 1 तरफ कामया का रोल थोड़ा घटेगा भी & फिल्म में थोड़ा निखार भी आ जाएगा.वो जानती थी की कामया 1 स्टार है जिसके करोड़ों चाहनेवाले हैं & ट्रस्ट फिल्म्स अपने मुनाफे के लिए उसके स्टारडम को भुनाने की कोशिश तो करेगी ही लेकिन अब नहीं.बस कुच्छ ही दीनों की बात थी उसके बाद सलोनी कामया को उसके पति को उस से बेरूख़् करने की सजा जरूर देगी.

तीसरी फिल्म की स्क्रिप्ट लगभग तैयार थी & डाइरेक्टर अब उसकी शूटिंग के लिए जगहों की तलाश शुरू करने वाला थशलोनि ने खुद को इसी फिल्म से जोड़ने का फैसला किया.वो 1 पूरी फिल्म को कागज़ के सफॉ पे 1 कहानी के होने से लेकर उसके फिल्मी पर्दे पे रिलीस करवाने तक के सारे काम-काज का हिस्सा बन उसे अच्छे से समझ लेना चाहती थी.उसने कंपनी के उस आदमी से बात की जो फिल्म का एग्ज़िक्युटिव प्रोड्यूसर था & उसने उसे समझाया की फिल्म की स्क्रिप्ट के हिसाब से लोकेशन कैसे ढूनदनी है.

डाइरेक्टर,राइटर,कॅमरमन,आक्टर्स सब की राई के साथ कुच्छ जगहों को छूना जाता था शूटिंग के लिए.सलोनी ने सब से पहले इसी काम का हिस्सा बनाना तय किया.

“हेलो,मैं देवेन बोल रहा हूँ.”

“ही!कैसे हैं आप?”

“क्या बात है?तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना?”

“हाँ-2.क्यों?”

“नहीं,तुम्हारी आवाज़ से लगा जैसे तुम नसाज़ हो.”,सलोनी विक्रांत के साथ पिछली रात 1 पार्टी में गयी थी.वहां प्रणव ने उसे 1 कोने में खींच लिया & उसे चूमने लगा.तभी सलोनी के कानों में 1 जानी-पहचानी आवाज़ सुनाई दी-कामया की आवाज़.प्रणव उसके क्लीवेज को चूमने में मशगूल था & उसने वो आवाज़ नहीं सुनी थी.सलोनी ने उसे फुसला के वापस पार्टी में भेजा & खुद उस आवाज़ की ओर चल पड़ी.

पार्टी 1 होटल के बॅंक्वेट हॉल में थी & सलोनी उस से दूर 1 गलियारे में प्रणव के साथ खड़ी थी.गलियारा आगे जाकर भाई तरफ घूम रहा था & आवाज़ उसी तरफ से आ रही थी.प्रणव को वहसे भेज उस गलियारे के मोड़ पे गयी & चुप के देखा & उसे कामया के साथ विक्रांत बात करता दिखा.

“..समझने की कोशिश करो,डार्लिंग अभी हम शादी नहीं कर सकते.अंकल की मौत से पहले ही कंपनी के स्टॉक्स पे असर पड़ा.अब मानपुर वाला टेंडर अभी भरा है.ऐसे में उसे तलाक दे तुमसे शादी करूँगा तो 1 स्कॅंडल तो होगा ही & ये बात ग्रुप के लिए & नुकसानदेह होगी.फिर इतनी जल्दी तलाक मिलेगा भी नहीं.”

“विक्रांत,तुम मुझे धोखा देने की कोशिश कर रहे हो ना?..”,कामया रुआंसी थी,”..बस तुम्हारा मतलब निकल गया &..”,कामया सुबकने लगी.

“बिलकुल नहीं,जान.ई लव यू!”,विक्रांत उसे बाँहों में भर रहा था,”..मैं मना नहीं कर रहा तुम्हें बस वेट करने को कह रहा हूँ.”

“तो फिर तुमने उसे कंपनी की मालकिन क्यों बना दिया है?”,कामया ने उसके हाथ झटक दिए.

“मालकिन कहा है वो!घर में बैठी ऊब रही थी तो उसे वहां दिल बहलाने को भेज दिया,मेरी जान.कुच्छ दिन वेट करो.उस वक्त तक तुम्हें उसे झेलना पड़ेगा & उसके लिए मैं तुमसे माफी चाहता हूँ.मानपुर वाला टेंडर तो हमें ही मिलना है पर अभी वो मिला नहीं है.1 बार वो मिल जाए तो फिर ग्रुप की पोज़िशन & मज़बूत हो जाएगी,फिर सलोनी को चलता करूँगा & तुम बनोगी मिसेज़.बजाज.”

“प्लीज़ विक्रांत,अपने वादे निभाना वरना मर जाऊंगी मैं!”,दोनों प्रेमी 1 दूसरे के आगोश में थे.सलोनी का दिल बहुत ज़ोर से धड़कने लगा था..आख़िर क्यों?..क्यों शादी की थी विक्रांत ने उस से?..& ये कामया से प्यार उसे हुआ कब?..पंचमहल में कितने खुश थे दोनों..ये कामया आख़िर आई कब उसके पति की जिंदगी में?

“चलो,पार्टी में चलें.कही कोई हम में से किसी 1 को ढूनदता हुआ यहां ना आ पहुँचे.”,सलोनी ने उनकी बात सुनी तो तेजी से वहां से निकल गयी.इसी बात से वो उदास & परेशान थी & इन्हीं भाव को देवेन ने उसकी आवाज़ में भाँप लिया था.

“जी,बस कल रात सोने में देर हो गयी थी.नींद पूरी ना होने की वजह से थोड़ी सुस्ती है.”

“ओह,अच्छा मैंने ये बताने को फोन किया था की दयाल के बारे में 1 सुराग तो मिला है मगर उसके लिए क्लायओोर्त के पास के किसी गाँव में जाना पड़ेगा.

“ओह,तो आप जा रहे हैं वहां?”

“हाँ.”

“हूँ.मैं कर दूं वहां जाने का इंतजाम या 1 मिनट..मुझे भी उस तरफ तो जाना है.”

“अच्छा,क्यों?”

“वो 1 फिल्म के सिलसिले में.”

“फिल्म?!”

“हाँ,आप यहां आकर मुझसे मिलिए तो सब बताती हूँ.”

“ठीक है.”

टोयोटा फॉर्चून उबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ते पे उच्छलती-कूड़ती बढ़ी जा रही थी.उस बड़ी,भारी गाड़ी को उस टूटे रास्ते पे संभाल के मगर तेजी से चलाने में सलोनी को काफी मजा आ रहा था.साथ की सीट पे बैठे देवेन ने उसे मुस्कुराते हुए देखा..अपनी मां की झलक थी इसमें लेकिन उस से कितनी अलग थी..कहा वो चुप-चाप रहने वाली सीधी-शादी लड़की & कहा ये बेबाक,भरोसे से भारी हुई लड़की!

देवेन गोपालपुर के पास की उस जेल में गया था जहां दयाल क़ैदियो को चोरी से समान बेचा करता था.उस जेल से उसने उस वक्त के जेल के अफसरों के नाम निकलवाई थे.उसकी किस्मत अच्छी थी की उनमें से रिटायर्ड अफ़सर वही रहता था.जब देवेन उस से मिला & दयाल के बारे में पूछा तो उस भले आदमी ने देवेन को उन 4 लोगों के बारे में बताया जिनके साथ मिल के वो ये काम किया करता था.देवेन ने उन चारों की तलाश शुरू कर दी लेकिन पहली 2 कोशिशों में वो नाकाम रहा.

उसकी फेहरिस्त में पहला नाम जिस शख्स का था वो मर चुका था & दूसरा अपने बेटे के साथ विदेश चला गया था.अब वो सलोनी के साथ फेहरिस्त के तीसरे शख्स की तलाश में क्लायओोर्त के पास के 1 गाँव सनार जा रहा था.उसे पता चला था की बालम सिंग नाम का वो शख्स वहां मशरूम की खेती करता था.

सलोनी ट्रस्ट फिल्म्स की अगली फिल्म की लोकेशन स्काउटिंग के लिए क्लायओोर्त के आस-पास के इलाके का मुआइना करने आई थी.विक्रांत नानिताल….

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