मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 53

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में ही था & सलोनी ने पता कर लिया था की कामया शूटिंग के लिए स्विट्ज़र्लॅंड गयी है & 15 दीनों से पहले वापस नहीं आनेवाली.उसे अपने पति का उस से मिलने का कोई डर नहीं था & इसी का फायदा उठाकर वो अपनी मां & उसके प्रेमी को धोखा देने वाले शख्स का पता लगाने के लिए देवेन के साथ निकल पड़ी थी.

लोकेशन स्काउटिंग के लिए फिल्म के राइटर के साथ 1 असिस्टेंट डाइरेक्टर,असिस्टेंट कॅमरमन & वो आए थे.डाइरेक्टर कॅमरमन & 2 & लोगों के साथ कोई & जगह देखने गया था.ये सलोनी का ही सुझाव था की डाइरेक्टर अपनी पसंदीदा जगह देख आए & वो शॉर्टलिस्ट की बाकी जगहों को देख उसे रिपोर्ट दे देगी & फिर डाइरेक्टर फैसला ले लेगा की उसे कहा शूटिंग करनी थी.इस तरह से वक्त की बचत हो रही थी.सलोनी ने कल ही काम खत्म किया था & अपनी रिपोर्ट लिख के डाइरेक्टर के असिस्टेंट को दे दी थी इस हिदायत के साथ को उसे अपने बॉस को दे दे.उसके बाद वो देवेन के साथ निकल पड़ी थी.

“शाम गहरा रही है..”,देवेन ने खिड़की से बाहर आसमान को देखा,”..बेहतर होगा की आज की रात यही किसी गाँव में गुजर लें.”

“हूँ..लेकिन यहां रहने की जगह कैसे मिलेगी?”,सलोनी ने देखा दूर कुच्छ बत्तियाँ टिमटिमा रही थी & उसने कार उधर ही बढ़ा दी.

“कुच्छ ना कुच्छ तो मिल ही जाएगा.”,थोड़ी देर बाद कार 1 छोटे से गाँव में थी.सलोनी ने कार गाँव के बाज़ार में लगाई जहां सिर्फ़ 4 दुकाने थी.1 किराने की,1 हलवाई की,1 लोहार की & 1 कोयले की.इस वक्त केवल किराने की & हलवाई की दुकाने खुली थी लेकिन लग रहा था की वो भी बस बंद करने ही वाले हैं.

“क्यों भाई यहां कही रहने को जगह मिलेगी?”,देवेन ने किराने वाले से 1 माचिस खरीदी.वो अपना लाइटर अपने होटल के कमरे में भूल आया था & रास्ते में सलोनी के साथ की वजह से उसने 1 भी सिगरेट नहीं पी थी & अब उसका हाल बुरा था.उसने सिगरेट सुलगा के 1 लंबा कस भरा & फिर सुकून से धुएँ को बाहर छोडा.

“यहां कहा साहब..हाँ,सनार में मिल जाएगा होटल.”

“फिर भी यार कुच्छ तो इंतजाम होगा..कोई धर्मशाला,कोई सराई?”

“नहीं साहब यहां तो कुच्छ भी नहीं मिलेगा.वैसे आप यहां क्या करने आए हैं?”,दुकानदार ने दुकान से थोड़ा हटा कर कार से तक लगाकर खड़ी सलोनी को देखा.कसी जीन्स & बिना बाज़ू के टॉप में सलोनी के जिस्म के सारे कटाव उभर रहे थे.

“यहां नहीं हम तो सनार ही जा रहे थे लेकिन अंधेरा होने लगा तो सोचा रात यही गुजार लें.”,देवेन को उसका सलोनी को यू घूर्ना अच्छा नहीं लगा & उसे बहुत गुस्सा आया.उसका दिल किया की उसी वक्त उसे 4-5 झापड़ रसीद कर दे!मगर अपने गुस्से पे काबू रखते हुए वो थोड़ा डाई तरफ हो गया ताकि सलोनी उस किरनेवाले की ललचाई निगाहों से चुप जाए.

“तो साहब..यहां तो..”,वो सोचने लगा,”..अच्छा चलिए,मैं मुखिया जी के पास ले चलता हूँ.वो कुच्छ ना कुच्छ कर ही देंगे.”,सलोनी ने हलवाई से उसके बचे-खुचे समोसे खरीद लिए थे & खाने लगी थी.दुकान बंद कर वो दुकानदार देवेन के साथ उसके करीब आए तो उसने पत्ते का दोनों उनकी ओर बढ़ा दिया.देवेन ने मना किया तो सलोनी ने मुस्कुराते हुए दुकानदार को समोसे पेश किए.दुकानदार की तो जैसे किस्मत खुल गयी & वो बेवकूफो की तरह हंसते,शरमाते हुए समोसा उठा खाने लगा.

गाँव में मुश्किल से 30 घर होंगे & दुकानदार उन्हें वहां के सबसे बारे घर में ले गया.मुखिया वही रहता था.1 70 बरस का बिलकुल बुड्ढा शख्स घर के अंदर आँगन में बैठा हुक्का गुदगुदाता खांस रहा था.

“आप दोनों हो कौन?”,देवेन ने सलोनी को देखा & सलोनी ने देवेन को.अभी तो दोनों ने अपना नाम बताया था,”..देखो,जगह तो मिल जाएगी लेकिन ये बताओ की दोनों क्या लगते हो 1 दूसरे के?”,देवेन नहीं समझा मगर सलोनी उसके सवाल का मतलब समझ गयी.

“ये मेरे पति हैं.हम दोनों सनार जा रहे हैं क्योंकि सुना है वहां कोई विदेशी सब्ज़ी की खेती होती है & उसके आगे जाकर 1 छोटी पहाड़ी नदी भी है ना जबकि बहुत खूबसूरत है उसी को देखने जा रहे हैं.हमारे होटल है ना शहर में तो सोचा की देखे शायद वहां से कुच्छ सस्ती सब्जियां हमें सप्लाइ हो सकें.”,देवेन उसके जवाब से चौंक गया & फौरन पलट के उसे देखा.

“हां-हाँ..”,बुड्ढे की नज़र अब उसी पे थी.उसने झट से झूठ बोला & 1 सिगरेट सुलगा ली.पिछली उसने घर में घुसने से पहले फेंक दी थी.

“हूँ..आओ.”,तीनों उठे तो बुड्ढे ने किसी नौकर को आवाज़ दी.सलोनी ने अपनी भाई बाँह देवेन की डाई बन में फँसा दी.उसने तो ऐसा बुड्ढे को ये यकीन दिलाने के लिए किया था की दोनों पति-पत्नी हैं लेकिन उसे बिलकुल अंदाज़ा नहीं था की उसके जिस्म में बिजली का करेंट दौड़ जाएगा.उसके दिल में गुस्ताख अरमानों ने अंगड़ाई ली & उसने अपने चेहरे को देखते देवेन की निगाहों से शर्मा के अपना मुँह फेयर लिया.देवेन भी उस खूबसूरत लड़की के मुलायम,महकते एहसास से मदहोश हो गया था.उसके जिस्म के रोएँ खड़े हो गये थे & धड़कन तेज हो गयी थी.सलोनी को कुच्छ औरतों की दबी हँसी की आवाज़ सुनाई दी.उसने गर्दन घुमाई तो 1 पर्दे की ओट से 2-3 औरतें खड़ी दिखी.वो मुस्कराई & ‘अपने पति’ के साथ मुखिया & उसके नौकर के पीछे हो ली.

“मुखिया जी,आपके गाँव का नाम क्या है?”

“हराड.”,मुखिया इतनी उमर के बावजूद बिना सहारे के बिलकुल सीधा चल रहा था.

“बहुत साफ-सुथरा है & बिजली भी है यहां तो.”

“हाँ.मुझे कूड़ा-कचरा नहीं पसंद तो सभी को हिदायत देता रहता हूँ & बिजली के लिए तो पूछो मत कितना भागना-दौड़ना पड़ा.”,चारों गाँव में & अंदर आ गये थे.नौकर 1 घर के ताले को खोल रहा था,”..आओ यहां बैठो.जब तक ये अंदर साफ-सफाई कर ले.ये मेरे छोटे भाई का घर है.वो यहां नहीं रहता.”,दोनों घर के बाहर की सीढ़ियों पे बैठ गये.

“खाने हमारे साथ ही खाना.यहां कोई परेशानी नहीं होगी,आराम से सोना.”,बुड्ढे ने मुस्कुराते हुए देवेन को देखा & ‘सोने’ पे ज़ोर दिया.देवेन ने कोई जवाब नहीं दिया & बस सिगरेट फूंकता रहा.सलोनी के गाल उस बात से थोड़े सुर्ख हो गये लेकिन दिल में 1 उमंग भी उठी.थोड़ी ही देर में नौकर ने सब साफ कर दिया था.

सभी अंदर गये तो देखा की आँगन के बाद 1….

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