मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 54

0
997

बड़ा सा कमरा था जिसमें बड़ी आरामदेह कुर्सियाँ & 1 मेज़ थी & दूसरे में 1 बिस्तर था जबकि थोड़ा छोटा था.उसपर 2 आअदमी तो सो सकते थे लेकिन फिर दोनों के जिस्मो का टकराने से बचना नामुमकिन था.उस बिस्तर को देख सलोनी का दिल धड़क उठा.1 तरफ 1 गुसलखाना बना था जिसमें बल्टियो नौकर ने कुएँ से ला कर पानी रख दिया था.देवेन किराने की दुकान के सामने खड़ी कार को उस घर के बाहर ले आया तो नौकर ने उस से उनका समान उतार के अंदर रख दिया.फिर वो वापस मुखिया के घर गया & 1 लातें जलके वहां रख दी.

“अभी 2-3 घंटे के लिए जाएगी बिजली.रोज़ ही जाती है.”,मुखिया ने उसकी सवालिया निगाहों को देख जवाब दिया.

“अच्छा,चलता हूँ..”,देवेन मुखिया को बाहर तक छोडने आया.नौकर उनसे दूर खड़ा था,”..नहा-धो के खाना खाने आ जाना.हम ज़रा जल्दी सो जाते हैं.वैसे तुम्हें भी जल्दी ही होगी सोने की?”,मुखिया फिर दोहरे मतलब वाली बात बोल के हंसा.देवेन भी बस हंस दिया,”..मेरी तरह तुम भी असल मर्द हो.मैं तुम्हें कुच्छ उपाय बताऊंगा ताकि जब मेरी उमर में पहुँचो तो भी ये दम-खम बरकरार रहे.”

“नहीं,मुझे जरूरत नहीं.”,देवेन को अब उस बुड्ढे की बातें हद से बाहर जाती दिख रही थी लेकिन वो उसे नाराज़ नहीं करना चाहता था.

“पक्के मर्द हो!”,बुड्ढा फिर हंसा,”..अपनी मर्दानगी के आगे जाकर कमज़ोर होने की बात से तिलमिला गये?..कोई बात नहीं पर मैं बताऊंगा तुम्हें उपाय.भरोसा करो,आगे जाकर बहुत काम आएँगे तुम्हें.अच्छा चलो जाकर नहा लो.मैं खाने पे वेट करूँगा.जल्दी आना.असल में मैं ज़रा जल्दी सोता हूँ.”,बुड्ढे ने सोता लफ़्ज़ पे फिर ज़ोर दिया & हंसता हुआ नौकर के साथ चला गया.देवेन कुच्छ देर उसे जाते देखता रहा & फिर अंदर आ गया.

“तुमने उस मुखिया से ये क्यों कहा की हम..हम पति-पत्नी हैं?”,देवेन & सलोनी उस मुखिया के घर खाना खाने जा रहे थे.सलोनी अभी भी जीन्स पहने थी बस ऊपर का टॉप बदल लिया था.अब उसने 1 काली वेस्ट पहन ली थी जिसमें उसकी बड़ी छातियों का आकर साफ उभर रहा था.देवेन को ये अच्छा तो नहीं लगा था क्योंकि वो जनता था की अब वहां के मर्द उसे & घुरेंगे.

“ऐसा ना कहती तो हमें रहने की जगह नहीं मिलती.अगर मैं सही बात बताती तो उसे लगता हम झूठ बोल रहे हैं & वो हमें चलता कर देता ताकि यहां रुक के हम यहां के माहौल को ना ‘बिगड़ेन’.”,सलोनी हँसी.दोनों मुखिया के घर की दहलीज पे थे.चाँद की रोशनी में सलोनी का खूबसूरत चेहरा चमक रहा था.देवेन का दिल किया की उसके गाल को चूम ले..अभी उसका हाथ पकड़ उसे वापस उस घर में ले जाए & उसके हुस्न को करीब से देखे..बहुत करीब से..उठने करीब से जितना 1 मर्द & औरत के लिए संभव होता है..सलोनी सीढ़िया चढ़ रही थी.देवेन का हाथ आगे बढ़ा लेकिन तब तक अंदर से कोई बाहर आ गया था.

“ये मेरी पत्नी है.”,बमुश्किल 20 बरस की 1 लड़की आगे तक घूँघट गिराए खाना परोस रही थी.सलोनी तो खाते-2 चौंकी & देवेन भी.बुड्ढा देवेन की ओर देख मुस्कराया,”..यहां पास के जंगल में बड़ी जोरदार बूटियाँ होती हैं.मैं कल तुम्हें दूँगा..”,वो उसके कान में फुसफुसाया,”..जैसे बताऊंगा वैसे लेना तो ये..”,उसका इशारा सलोनी की ओर था,”..पूरी जिंदगी तुम्हारी बाँदी बन के रहेगी जैसे मेरी घरवाली है.”,दोनों का खाना खत्म हो गया था & दोनों उठ के हाथ ढोने जा रहे थे,”..गाँव के कई नौजवान इसे खराब करने के चक्कर में लगे रहते हैं..”,1 नौकर लोटे से उनके हाथ ढूलवाले लगा,”..लेकिन मेरी मर्दानगी के नशे में डूबी इसकी आंखों को वो लंगूर दिखते ही नहीं!”,वो हंसा तो देवेन भी 1 फीकी हँसी हंस दिया.उसकी बातें उसे असहज कर रही थी & उसका दिल सलोनी के नंगे जिस्म के उस से लिपटे होने का तस्साउर करने लगा था.

“वो तो उसकी पोती के बराबर है!”,दोनों खाना कहा के लौट रहे थे,”..कैसे शादी हुई होगी इनकी?!”,सलोनी बोले जा रही थी.दोनों घर तक पहुँचे ही थे की सलोनी के पैर में कुच्छ ठोकर लगी & वो गिर गयी,”आउच!”

“क्या हुआ?!..ठीक तो हो?”,देवेन ने उसे सहारा दे के उठाया & फिर जेब से निकल के मोबाइल ऑन किया.उसकी रोशनी के सहारे दोनों घर के अंदर पहुँचे तो देवेन उसे सीधा उस कमरे में ले गया जहां बिस्तर लगा था,”देखु,कहा चोट आई है.”सलोनी के बदन के दाएँ हिस्से पे धूल लगी थी जिसे वो झाड़ रही थी,”..पाँव में लगी है लगता है.”,वो झुक के बैठ गया & सलोनी का दया पाँव उठा लिया.सलोनी के जिस्म में झुरजुरी दौड़ गयी & उसके मुँह से हैरत भारी आ निकल गयी.

देवेन ने उसके पाँव को बाए हाथ में थमा हुआ था & दाएँ से वो धीरे-2 उसपर लगी धूल हटा रहा था.पाँव में हल्की खरॉच आई थी & सबसे छोटी उंगली में कुच्छ चुबा भी दिख रहा था.सलोनी के जिस्म को छूते ही उसके भी अरमान जगह उठे थे..कितनी कोमल त्वचा है इसकी..कितने खूबसूरत & नाज़ुक पाँव..जी करता है चूम लू इन्हें..सलोनी की भी सांसें तेज हो गयी थी. देवेन ने उसके पाँव को थोड़ा & करीब से देखा.छोटी उंगली में 1 काँटा चुबा था.उसने पाँव को दाएँ हाथ में पकड़ा & बाए से काँटे को खींचा.देवेन ने उसके पाँव को ज़मीन पे रखा & उसकी डाई तंग पे जीन्स की सीम के ऊपर नीचे से ऊपर तक बहुत ही धीमे से अपने दाएँ हाथ की 1 उंगली चलाई.सलोनी ने माता दीवार से लगा लिया.उसके दिल में उमंगों की लहरें अब बहुत तेजी से उमड़ रही थी.देवेन उसकी मां से बेइंतहा प्यार करता था,ये जानते ही उसके दिल में उसके लिए इज्जत पैदा हो गयी थी & लगाव भी.वो पहले दिन से ही उसके साथ केवल सुमित्रा के नाम से जुड़ी ग़लतफहमी को दूर करने के लिए नहीं हुई थी.उसके दिन ने उस से कहा था की उस भले इंसान की मदद करके ही उसका शुक्रिया अदा करे.मगर अभी जो हो रहा था उसे वो बिलकुल भी गलत या बुरा नहीं लग रहा था.

“हान्न्न्ंह..!”,सलोनी मामूली से दर्द & बड़ी सी कसक से आहट हो गयी थी.रात के वक्त,चारों तरफ फैली खामोशी में 1 घर में,1कमरे में उन दोनों का तन्हा होना-रोमानी माहौल ने उसके ऊपर असर करना शुरू कर दिया था.खून की 1 बहुत छोटी सी बंद उसकी गोल सी उंगली पे दिख रही थी.देवेन ने उस….

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here