मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 56

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कंधे पे पहुँचे.

“आन्न्न्नह..!”,सलोनी चीख के बाँह नीचे करने लगी क्योंकि देवेन के होंठ उसकी चिकनी बगल से जा लगे थे.देवने उस जगह के उठने मुलायम होने से हैरान था.वहां के बाल कितने भी साफ कार लो,वो जगह औरत के बाकी जिस्म की तरह उतनी कोमल नहीं होती लेकिन सलोनी को तो उपरवाले ने कुच्छ ज्यादा ही फुर्सत में बनाया था.देवेन ने उसकी बाँह को मज़बूती से दीवार से लगे & अपनी जुबान से उसकी बगल को चखने लगा.सलोनी की सांस अटक गयी,ऐसे वहां पे उसे किसी ने प्यार नहीं किया था.देवने की आतुर जुबान से उसे गुदगुदी के साथ सिहरन भरा एहसास हो रहा था.उस अनूठे एहसास को उसका जिस्म ज्यादा नहीं झेल पाया & देवेन के बाए हाथ की उंगलियों को बहुत ज़ोर से कसते,काँपते हुए आहें भरती सलोनी झाड़ गयी.

वो गिर ही जाती अगर देवेन उसकी कमर को जकड़ उसे बाँहों में थाम ना लेता.उसने भी अपने हाथ उसके कंधों पे रख दिए थे.वो उसके लंड की सख्ती महसूस कर रही थी & वो भी उसके मुलायम जिस्म के आकर को अपने जिस्म से मिलते महसूस कर रहा था.दोनों की नज़रे आपस में उलझी हुई थी & उनके रास्ते 1 दूसरे का हाल दोनों को मिल रहा था.देवेन ने उसे वैसे ही उठा लिया & लिए-दिए बिस्तर पे लेट गया.उसके जिस्म के बाहर के नीचे दबी सलोनी ने अपनी बाहे उसकी गर्दन पे कस प्यार से उसके बालों में हाथ फेरा & दोनों के होंठ 1 शिद्दत भारी किस में जुड़ गये.दोनों 1 दूसरे की ज़ुबानो से खेल रहे थे,उन्हें चूस रहे थे.उनके हाथ 1 दूसरे के चेहरे पे घूम रहे थे अपनी हसरत,अपनी बेकरारी बयान कर रहे थे.दोनों को अब कोई होश नहीं था सिवाय इसके के की उनकी पसंद के शख्स का जिस्म उनकी बाँहों में है & वो उसे जी भर के प्यार कर सकते हैं.

काफी देर के बाद जब सांस लेने की जरूरत महसूस हुई तो दोनों के लब जुड़ा हुए.दोनों तेजी से सांसें लेते हुए 1 दूसरे को देख रहे थे.सलोनी ने नशीली आंखों से देखते हुए अपने अरमानों को जाहिर करते हुए देवने के सीने पे हाथ फिराए तो उसने उसके हाथ शर्ट की स्तनों पे रख दिए.सलोनी को उसकी गर्म निगाहों से शर्म आ रही थी.उसने मुँह फेयर लिया & स्तनों खोलने लगी.आख़िरी स्तनों खोल उसने अपनी मां के प्रेमी-जबकि अब उसका प्रेमी बन चुका था,को देखा तो वो उठा & अपनी कमीज़ निकल दी.उसका चौड़ा सीना ज्यादातर सफेद & कुच्छ काले घने बालों से पूरा ढँका हुआ था.

सलोनी का दिल खुश हो गया & उसके हाथ देव्बें के सीने पे चले गये.उसकी आंखों में उसके जिस्म की तारीफ उतार आई थी & वासना के डोरे भी.सीने के बालों को हसरत से छूते हुए उसने ऊपर देखा तो देवेन को खुद को देख मुस्कुराते पाया & शर्मा के उसने हाथ खिकन्ह लिए.देवेन हंस दिया & उसके चेहरे पे उंगली फिरने लगा.सलोनी ने आंखें बंद कर चेहरा डाई तरफ घुमा लिया…. देवेन की उंगली उसके चेहरे से उतार के उसकी गर्दन से होते हुए उसके क्लीवेज के पास आ के रुकी.सलोनी धड़कते दिल से सीने के उभारो को ऊपर-नीचे करते उसे देखने लगी.

देवेन की उंगली 1 पल को वहां रुक उसके बाए कंधे पे गयी & उसकी वेस्ट के स्ट्रॅप को नीचे सरका दिया.सलोनी ने भी कंधे सिकोड़ उसे उतरने की इजाज़त दे दी.देवेन ने उसके दूसरे कंधे से भी स्ट्रॅप उतार वेस्ट को उसके सीने के नीचे सरका दिया.काले ब्रा में कैद सलोनी की च्चातियाँ उसकी सांसों की बेकरारी की कहानी कहती ऊपर-नीचे हो रही थी.देवेन का हाथ उतरी वेस्ट के नीचे उसके पेट पे रखा था & वहां धीरे-2 सहला रहा था.दोनों 1 तक 1 दूसरे को देखे जा रहे थे.

वो फिर झुका & उसे चूमने लगा.उसने सलोनी के चेहरे को अपनी किस्स से ढँक दिया.वो उसके बालों को सहलाती उसके होठों का लुत्फ़ उठा रही थी.देवेन उसके सीने पे आया मगर चूमा नहीं.सलोनी अब तड़प रही थी उसके होठों & हाथों को वहां महसूस करने के लिए.उसकी चुत बहुत ज्यादा कसमसा रही थी.देवेन उसके सीने के उभारो को देखता हुआ नीचे आया & उसकी वेस्ट उठाकर उसके पेट को चूमने लगा.गोल पेट पे उसके तपते लब महसूस करते सलोनी की आहें निकलनी शुरू हो गयी.

देवेन के होठों में गर्मजोशी थी,जोश था लेकिन वो ज़रा भी बेसब्र नहीं था.उसके पास मानो वक्त ही वक्त था सलोनी को प्यार करने के लिए & खुद के झड़ने की उसे जैसे कोई चिंता ही नहीं थी!.सलोनी की नाभि में दाएँ हाथ की सबसे बड़ी,बीच की उंगली घुसा के उसे कुरेदते हुए जब उसने उसमें हौले से जीभ फिराई तो सलोनी ने बदन को कमान की तरह मोड़ लिया.उसकी नाभि की गहराई नाप के देवेन उसके पेट को & चूमने के बाद देवेन ने & नीचे का रुख किया.

उसने जीन्स के ऊपर से ही सलोनी की जांघों को चूमा.कसी जीन्स & पैंटी के अंदर उसकी चुत अब बिलकुल बावली हो गयी थी.देवेन उसके पैरों तक पहुँच गया था & अब उसकी उंगलियां चूस रहा था.उसने उसके तलवे चूमे & फिर से उसकी टांगों के रास्ते उसकी जांघों तक आ गया & उसकी चुत के ऊपर आया..क्या कर रहा है वो?..ये सुमित्रा की बेटी है..उसके साथ ये सब..उसका दिल उसे अचानक रोकने लगा था..तो क्या हुआ?..वो भी चाहती है तुम्हें..आगे बढ़ो..बुझाओ अपनी & उसकी प्यास..

सलोनी शायद उसकी उलझन समझ गयी थी.देवेन का दया हाथ उसके पेट पे था & वो उसके ऊपर झुका कशमकश में पड़ा था.उसने अपना बया हाथ उसके पेट पे रखे हाथ पे रखा & उसे उठाकर अपनी जीन्स के ज़िप पे रख दिया.देवेन ने गर्दन घुमा उसे देखा तो सलोनी ने हाँ में सर हिलाया.देवेन उसे देखे जा रहा था.उसकी आंखों में इजाज़त दिख रही थी उसे..हसरत भी..जोश भी..खुमारी भी..वो सारे एहसास जो उसके दिल में भी घूमड़ रहे थे.सलोनी ने उसके ज़िप पे रखे हाथ को दबाया तो उसके हाथ ने खुद बीए खुद ज़िप नीचे खींच दी.

देवेन ने चौंक के ज़िप की तरफ देखा & फिर सलोनी की तरफ.वो मुस्करा रही थी.उस मुस्कान में बस खुशी थी,केवल खुशी.देवेन के होठों पे भी वैसी ही मुस्कान खेलने लगी & उसके हाथ सलोनी की जीन्स के वेयैस्टबंड में फँस गये.उसने बहुत….

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