मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 57

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प्यार से जीन्स को नीचे खींचा.सलोनी ने कमर ऊपर उचका दी & वो उसकी कसी जीन्स को धीरे-2 नीचे करने लगा.वो उसके पैरों के पास गया & जीन्स को पकड़ के नीचे किया.उसके अक्पडे उतरने में कोई जल्दबाज़ी नहीं थी.सलोनी को पता था की वो बहुत जोश में है लेकिन उस वक्त भी उसे उसका ख्याल था & वो हर काम उसके आराम & मजे को मद्देनज़र रख के कर रहा था.

देवेन ने जीन्स पूरी खींच दी & काली ब्रा & पैंटी में बिस्तर पे लेती लंबी-2 सांसें लेती सलोनी को निहारने लगा.सलोनी को शर्म आ रही थी..वो पहली बार उसके सामने इस हालत में थी.हया ने अब तो उसे पूरा आ घेरा & उसने आंखें बंद कर ली.कुच्छ देर तक जब उसने देवेन के हाथों को अपने जिस्म पे महसूस नहीं किया तो उसने अपनी हया को समझा-बुझा के पलकों की चिलमन को ज़रा सा हटाया & उसे वो अपनी पेंट उतरता दिखा.काले आंडरवेयर में कैद उसका लंड बहुत बड़ा था,ये उसे देखते ही वो समझ गयी थी.उसने थूक गटका..उसका हलक सुख गया था आने वाले मजे के ख्याल से!

देवेन बिस्तर पे आ गया & उसके कंधे पकड़ उसे उठाया.सलोनी शर्म से दोहरी हुए जा रही थी……उसका दिल फिर से गुस्ताख बातें सोचने लगा था.देवेन बिस्तर पे बैठ गया & उसे अपनी टांगों के बीच अपने पहलू में ले लिया.सलोनी अब अपना दया कंधा उसके सीने से लगाए उसके बाए कंधे पे सर रखे उसकी बाँहों में थी.

देवेन ने उसे भाई बाँह के सहारे में घेरा हुआ था & दाएँ हाथ से उसके हसीना चेहरे को ठुड्डी से उठा रहा था.सलोनी को अपनी गांड के बगल में उसका सख्त लंड चुभता महसूस हो रहा था.उसकी चुत अब & कसमसाने लगी थी.देवेन झुका & सलोनी ने खुले होठों के साथ उसके होठों का इसटेक्बल किया.दोनों पूरी शिद्दत एक साथ 1 दूसरे को चूमने लगे.सलोनी के हाथ उसके सर के बालों से लेकर कंधों,पीठ & सीने पे घूम रहे थे.देवेन भी उसकी पीठ पे अपने सख्त हाथ फेरता उसकी कमर को हौले-2 मसलता उसे चूम रहा था.

देवेन मज़बूत शरीर का मलिक था.जेल में की मशक्कत ने उसके जिस्म को थोड़ा नहीं था बल्कि फौलाद सा सख्त बना दिया था.उसका सीना चौड़ा & बाज़ू बारे मज़बूत थे.जांघें भी पेड़ो के तनो जैसी लग रही थी.सलोनी उसकी गिरफ्त मने महफूज़ महसूस कर रही थी.वो अपनी सारी परेशानियाँ,सारी उलझने भूल गयी थी.

देवेन के बाज़ू जैसे उसे अपनी पनाह में ले उस से ये वादा कर रहे थे की वो हमेशा उसकी हिफ़ाज़त करेंगे & यहू ही उमर भर थामे रहेंगे..

दोनों अनजाने में 1 दूसरे की नकल कर रहे थे.देवेन उसकी मखमली पीठ को सहलाता तो वो भी उसकी सख्त पीठ को अपने हाथों में भींचने लगती.सलोनी के हाथ उसके सीने के बालों में घुस जाते तो वो भी उसके क्लीवेज पे बारे हल्के-2 अपनी डाई हथेली चलाने लगता.उसके हाथ सलोनी की मखमली जांघों पे फिसले तो सलोनी ने भी उसकी बालों भारी आंद्रूणई जांघों को सहलाया & जब सलोनी ने उसके गले में बहन डाल उसे ज़ोर से चूमा तो उसने भी जवाब में बाए हाथ से उसके जिस्म को खुद से पूरा सटाते हुए दाएँ से उसकी ठुड्डी को पकड़ अपनी जुबान उसके मुँह में घुसा दी.

“उउन्न्ञनननगगगगगगगघह……!”,सलोनी ने किस तोड़ी & उसके अकनध्े पे सर रख वहां पे चूमते हुए छटपटाने लगी.वो फिर से झाड़ गयी थी.देवेन के हाथ उसकी पीठ सहलाते हुए उसे संभालने लगा.थोड़ी देर बाद सलोनी ने सर कंधे से थोड़ा ऊपर करते हुए देवेन के बाए गाल को चूमा तो देवेन ने उसकी पीठ पे दोनों हाथ ले जाकर उसकी ब्रा के हुक्स को खोल दिया.लाज की 1 नयी लहर ने सलोनी को आ घेरा..वो उसकी नंगी च्चातियाँ देखने वाला था..क्या उसे वो खूबसूरत लगेंगी?..क्या पसंद करेगा इन्हें वो?..वो हैरत में पड़ गयी..आज तक उसके दिल में कभी भी ऐसा ख्याल नहीं आया था बल्कि वो तो ये मान के ही चलती थी की उसके जिस्म को नापसंद करने की हिमाकत तो कोई मर्द कर ही नहीं सकता!

देवेन ने उसके ब्रा को उसकी बाँहों से बाहर खींचा & गुलाबी निपल्स से सजी सलोनी की बड़ी-2,कसी च्चातियाँ उसकी आंखों के सामने च्चालच्छला उठी.देवेन का मुँह खुला खुला रही गया…बाला की खूबसूरत थी वो!..बिलकुल गोल,कसी & निपल्स का रंग कितना दिलकश था!..कैसे सख्त हो रहे थे उसके निपल्स..दिल की धड़कनों के साथ ऊपर-नीचे होता हुआ उसका सीना इस वक्त & जानलेवा लग रहा था.

देवेन का दया हाथ काँपते हुए आगे बढ़ा.उसे लग रहा था की उसके हाथ उस शफ्फाक़ गोरी हुस्न पड़ी के बदन को मैला कर देंगे & वो झिझक रहा था.उसने सलोनी की निगाहों में देखा & उसने सर उसके कंधे से थोड़ा सा उठाकर उसके लब चूम लिए.देवेन ने अपना कानपता हाथ आगे बढ़ाया & बहुत हल्के से सलोनी की भाई छाती पे रखा.

उस पल दोनों ही के जिस्मो में बिजली दौड़ गयी.सलोनी ने सर पीछे झटकते हुए आ भारी.उसका दिल कर रहा था की उसका आशिक अब उसके उन उभारो को अप्न्मे सख्त हाथों ताले राउंड डाले..कुचल दे उन फूलो को & उसके बेचैन दिल को करार पहुंचाए!..देवेन उसके सीने को देखते हुए बहुत हल्के हाथों से उसकी भाई छाती को सहला रहा था मानो यकीन करना चाह रहा हो की उसके हाथ उस अपरी के जिस्म को मैला नहीं कर रहे.

कुच्छ पलों बाद जब उसे ये भरोसा हो गया तो वो अपनी उंगली को उसकी चूची पे दायरे की शक्ल में घूमने लगा.उंगली चूची की पूरी गोलाई पे घूमते हुए उसके निप्पल की ओर तरफ रही थी & निप्पल पे पहुँचते ही उसने उसे ऐसे दबाया जैसे कोई स्तनों दबा रही हो.सलोनी चिहुनकि & अपना सीना & आगे कर दिया.देवेन अब उसकी छातियों को सख्त हाथ से दबाने लगा.सलोनी उसकी गोद में कसमसाते हुए आहें भरने लगी.

देवेन ने उसके सीने के उभारो को जूम के मसला.सलोनी के चेहरे पे शिकन पड़ गयी थी.उसे बहुत मजा आ रहा था.उसके जिस्म में दर्द उठने लगा था,मीठा दर्द & उसकी चुत तो रस की धार बहा ही रही थी.वो अपने होठों को अपने ही दाँतों से काट रही थी.देवेन तो जैसे उसे भूल ही गया था & उसे बस उसकी च्चातियाँ ही दिख रही थी.वो उन्हें देखते हुए उन्हें….

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