मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 58

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दबा रहा था.सलोनी ने उसका चेहरा पकड़ के ऊपर किया तो उसने उसे चूम लिया.बहुत देर तक वो उसकी चूचियाँ दबाते हुए,उसके निपल्स को रगड़ते हुए उसे चूमता रहा.

उसके बाद वो नीचे हुआ & उन मस्ती भरे उभारो को अपने मुँह में भर लिया.उसकी भाई बाँह पे टिकी सलोनी पीछे झुक ज़ोर-2 से आहें भरने लगी.देवेन की आतुर जुबान उसकी चूचियां को मुँह में भर चाट रही थी & वो अपनी भारी जांघें आपस में रगड़ते हुए अपनी चुत को समझा रही थी.सलोनी के दिल में भी अपने रेप्मि के जिस्म को चूमने की ख्वाहिश हुई & वो आगे हुई & अपने सीने से देवेन का सर ऊपर उठाया & झुक के वैसे ही उसके सीने को चूमने लगी जैसे वो उसके सीने को चूम रहा था.

वो मस्त आवाजें निकलते हुए उसके सीने के घने बालों में अपनी नाक घुसा के रगड़ रही थी & उसके निपल्स को चूस रही थी.देवेन जेल से निकालने के बाद कई औरतों के साथ हुमबईस्तर हुआ था.कुच्छ पेशेवर थी & कुच्छ वो थी जिन्हें उस से रिश्ता जोड़ने की उम्मीद थी.उन सभी औरतों में से किसी ने आज तक उसके निपल्स के साथ ऐसे खिलवाड़ नहीं किया था.वो आहें भरते हुए उसकी पीठ पे हाथ फिरने लगा .सलोनी उसके सीने को चूमते हुए थोड़ा नीचे गयी & फिर ऊपर आ उसे बाँहों में भर उसके सीने में मुँह छुपा लिया.

उसने उसकी ठुड्डी पकड़ चेहरा ऊपर किया & उसे चूमने लगा & चूमते हुए उसकी मखमली जांघों के आंद्रूणई हिस्सों को सहलाने लगा.सलोनी ने जांघें भींच उसके हाथ को कैद कर लिया लेकिन फिर भी वो उसकी जांघों को सहलाता रहा.सलोनी अब जोश में पागल हो गयी थी.उसने बेचैनी से अपनी कमर हिलाई तो देवेन ने उसकी हालत समझते हुए उसे बिस्तर पे लिटा दिया & उसकी पैंटी खींचने लगा.पैंटी उसकी चुत से चिपकी हुई थी & जब वो उसके जिस्म से अलग ही तो देवेन उसे सूंघने से खुद को रोक नहीं पाया.

अब वो उसके सामने बिलकुल नंगी पड़ी थी & उसका हुस्न अपने पूरे शबाब में उसके सामने था.सलोनी को बहुत शर्म आ रही थी.वो चाह रही थी की अपने जिस्म को ढँक ले मगर उसकी ये भी ख्वाहिश थी की देवेन उसके जिस्म को भरपूर प्यार करे.अब ये उलझन तो 1 ही सूरत में सुलझ सकती थी,अगर वो देवेन के जिस्म को खुद पे ओढ़ ले तो.

“आन्न्‍नणणनह..!”,वो कहयलो में खोई थी की देवेन उसकी जांघों को चूमने लगा था.उसने तड़प के करवट ले ली & देवेन उसकी चौड़ी गांड को चूमने लगा.उसके सख्त हाथ उसकी गांड को दबाने लगे & वो उसकी कमर के मांसल हिस्से को चूमने लगा.सलोनी अब मस्ती में बिलकुल पागल हो चुकी थी.बिस्तर की चादर को ज़ोर से भींचते हुए वो आहें भरे जा रही थी.देवेन ने सो सीधा किया & उसकी जांघें फैला दी.उसने उन्हें फिर से बंद कर लिया लेकिन उसने उसकी अनसुनी करते हुए उन्हें फैलाया & उसकी चुत पे झुक गया.

“हे भगवांनननननणणन्..हाईईईईईईईईई…….!”,सलोनी चीखी & बिस्तर पे छटपटाने लगी.स्ड़ूका प्रेमनी उसकी चुत चाट रहा था & उसकी जुबान अपने दाने पे महसूस करते ही वो झाड़ गयी थी.उसने देवेन के सर को अपनी मोटी जांघों में दबा दिया तो देवेन ने जीभ उसकी चुत में काफी अंदर तक उतार दी.उसके हाथ ऊपर आए & अपनी महबूबा की चूचियां पे कस गये.सलोनी कभी बेचैनी में उसके सर के बाल नोचती तो कभी चूचियाँ मसलते उसके हाथों पे अपने हाथ दबाती.ना जाने कितनी देर तक वो उसकी चुत से बहते रस को चाटता रहा & वो झड़ती रही.देवेन ने उस जैसी हसीना लड़की नहीं देखी थी.

वो उसके जिस्म को प्यार कर उसे दुनिया की सारी खुशियो से वाकिफ करना चाहता था.उसकी नाज़ुक,गुलाबी,कसी चुत देख उसका दिल खुशी & जोश से भर गया था & उसने उसे जी भर के चाहता,चूमा & चूसा था.अपनी उंगली उसमें घुसा उसने उसकी कस्वत महसूस की थी & उसका लंड उस एहसास से & सख्त हो गया था.

सलोनी ने नशे में बोझल पलकों को थोड़ा सा खोला तो देखा की देवेन अपना आंडरवेयर उतरने ही वाला है.ठीक उसी वक्त उसके दिल ने कहा की उसका लंड विजयंत के लंड जैसा ही होगा & जब आंडरवेयर नीचे सरका तो सच में सामने 9.5 इंच का लंड ताना खड़ा था.सलोनी ने सो देखा & अपने नीचे के होंठ को धीरे से कटा.देवेन का दिल बहुत ज़ोर से धड़क रहा था..ये क्या हो रहा था उसे?..

“आन्न्‍न्णनह..!”,उसने सलोनी की जांघें फैलाई & अपने लंड को हाथ में थाम उसकी चुत के दाने पे हल्के से मारा.सलोनी जैसे दर्द से च्चटपताई.लंड की मर उसे जोश से पागल कर रही थी.अभी तक आहो के सिवाय दोनों कुच्छ नहीं बोले थे & इस वक्त भी सलोनी ने बस कतर निगाहों से अपने आशिक को देखा मानो मिन्नत कर आ रही हो की & ना तडपए & दोनों जिंसो की दूरी को अब हमेशा-2 के लिए मिटा दे.देवेन ने उसकी आंखों को पढ़ लिया & इस बार लंड को उसकी गीली चुत की दरार पे रख आगे झुका.

“आआहह..!”

“ओईईईईईईईईईईईईईईईईई….माआआआआआआआअ..!”,दोनों प्रेमी कराह,देवेन उसकी चुत के बेहद कसे होने की वजह से & सलोनी उसके लंड की लंबाई & मोटाई से. इस वक्त अंदर जाते हुए वो सलोनी की चुत को बुरी तरह फैला रहा था.सलोनी को मस्ताना एहसास हुआ

देवेन ने झाँटो तक लंड को उसकी चुत में धंसा के ही दम लिया.जैसे ही लंड का सूपड़ा उसकी कोख से सटा सलोनी के जिस्म ने झटका खाया & वो झाड़ गयी.सलोनी हैरत & खुमारी में आहें भरने लगी..उसकी मर्दानगी की कायल हो गयी वो उसी पल!..अभी बस लकंड अंदर घुसा था & वो झाड़ गयी थी.

देवेन भी उसकी चुत के सिकुड़ने-फैलने की जानलेवा हरकत से चौक गया था & बड़ी मुश्किल से उसने खुद को झड़ने से रोका था.उसने अब बहुत धीमे & लंबे धक्को से उसकी चुदाई शुरू की.वो लंड पूरा बाहर खींचता & फिर जुड़ तक अंदर घुसा देता.लंड कोख से टकराता तो सलोनी के जिस्म में मानो सितार बजने लगते.वो खुशी में पागल हो गयी & उसने अपने आशिक को अपनी नाज़ुक,गुदाज़ बाँहों में अक्स लिया & उसके चेहरे पे अपने आभारी होठों से चूमने लगी.देवेन का लंड उसकी चुत की दीवारों को भी रगड़ रहा था.उसके हाथ उसकी छातियों….

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