मेरी सलोनी – एक प्रेम कहानी – 60

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खुशी पाई थी जिसके आबरे में उसके सपने में भी नहीं सोचा था.

देवेन ऐसे कभी नहीं झाड़ा था.इतनी कसी चुत में उसने कभी अपना लंड नहीं घुसाया था & झाड़ते वक्त जो खुशी उसे मिली वो बिलकुल अनूठी थी लेकिन सलोनी के थप्पड़ ने उसे हैरत में डाल दिया & उसे लगा की उसने कुच्छ गलत किया है.आजतक जब भी उसने चुदाई की थी उसके साथ की लड़की झड़ी जरूर थी मगर इस तरह से उसने किसी को झाड़ते नहीं देखा था.उसकी समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या करे & वो वैसे ही उसे बाँहों में थामे पड़ा रहा.

काफी देर बाद सलोनी होश में आई & उसकी रुआलयी रुकी तो उसने खुद को चिंता से देखते देवेन को देखा.कहते हैं दिल से दिल को राह होती है & उस पल जैसे इसी बात को सच साबित करते हुए सलोनी का दिल देवेन की उलझन समझ गया.वो फौरन ऊपर उचकी & उसे बाँहों में भर उसके गाल को चूमने लगी.देवेन ने वैसे ही सिकुड़े लंड को चुत में डाले हुए उसे बाँहों में भर उसके सर को ऊपर बिस्तर पे किया.

“सॉरी,आपको मारा मैंने.”,सलोनी की आंखों में अभी भी नशे के डोरे दिख रहे थे,”..मगर आपने मुझे ऐसे प्यार किया,जैसे कभी किसी ने नहीं किया है..& मैं वो खुशी झेल नहीं पाई थी.”,बात समझते ही देवेन के होठों पे मुस्कान आ गयी & उसने उसे गले से लगा लिया,”ई लव यू.”

देवेन ने उसके प्यार के इजहार को सुन सर ऊपर उठाया & उसकी आंखों में झाँकने लगा..वो इस लड़की की जान लेना चाहता था लेकिन आज उसे उस से जुड़ा होने के ख्याल से ही डर लग रहा है..वो उसकी जान बन गयी है..कैसा अजीब खेल खेला था उपरवाले ने,”ई लव यू टू.”,वो झुका & दोनों के होंठ 1 दूसरे की लज़्ज़त चखने लगे.

“उन्न्ञन्..मत जाए ना!”,बिजली चली गयी थी & देवेन उसकी छुट्टी से लंड खींच उठने लगा था जब सलोनी ने उसे रोक दिया था.

“अंधेरे में तुम दिख नहीं रही मुझे.लालटेन तो लाने दो.”,उसने उसके होठों पे दाएँ हाथ की उंगली को फिराया तो सलोनी ने मस्ती में आ भारी & उंगली के पोरो को चूमा & फिर उसे मुँह में भर चूसने लगी.

“चाँदनी तो आ रही है खिड़की से,लालटेन की क्या जरूरत है.”,सलोनी ने उसे बाँहों में भरे रखा.देवेन हंसा & उंगली को उसके होठों से हटा अंगूठे को उनपर दबा दिया.सलोनी ने उसे शरारत से काट लिया तो दोनों हँसने लगे मगर अगले ही पल देवेन खामोश हो गया & उसके चेहरे पे उदासी की परछाई आ गयी.

“क्या हुआ?”,सलोनी ने उसके चेहरे को हाथों में थाम लिया.

“कुच्छ नहीं.बस ये सोच रहा था की कुच्छ दिन बाद तुम अपनी जिंदगी में लौट जाओगी फिर मैं कैसे जियूंगा?..वही उलझन,वही बेकरारी फिर मेरे सीने को जलाने लगेगी.”

“ये उलझन,ये बेकरारी बस चाँद दीनों के लिए होगी.”,सलोनी ने उसके कंधे थामे & पलटने का इशारा किया तो वो उसके नीचे आ गया.सलोनी ने चुत से लंड को जुड़ा किया & उसके सीने को चूमते हुए नीचे जाने लगी.

“मुझे बहलाने की कोशिश कर रही हो?..चाँद दीनों की कैसे होगी?..तुम्हारी अपनी जिंदगी है,अपनी दुनिया है..आहह..!”,देवेन आंखें बंद कर कराह.सलोनी उसके लंड तक पहुँच गयी थी & उसे थाम के चूम लिया था.

“बहलाने की कोशिश नहीं कर रही.”,सलोनी ने सुपाडे पे लगे उसके वीर्य & अपने रस को चाहता.उसकी चुत से बह के देवेन का वीर्य उसकी जांघों से चिपक गया था,”..सच कह रही हूँ.अब मैं भी आपके बगैर नहीं रही सकती!”,सलोनी झुकी & लंड को मुँह में भर लिया & आंखें बंद कर चूसने लगी.

“ओह..सलोनी,पागल मत बनो!”,वो उठ बैठा था & लंड चुस्ती सलोनी के बाल सहला रहा था,”..मैं बस अपने दिल का हाल कह रहा था.मेरी वजह से अपना बसा-बसाया घर क्यों उजाड़ रही हो?”,सलोनी ने दाएँ हाथ के अंगूठे & पहली उंगली के दायरे में लंड को हिलना शुरू कर दिया था & साथ-2 उसे चूस भी रही थी.उसका दूसरा हाथ झाँटो से घिरे देवेन के अंदो को दबा रहा था.उसने लंड को हिलना छोडा & उसे मुँह में भरने लगी.उसकी सांस अटकने लगी थी लेकिन उसने लंड को अंदर लेना नहीं छोडा.लंड का कुच्छ हिस्सा उसके हलक में भी चला गया था.देवेन की कमर अपने आप हिल गयी.उसे ऐसा लग रहा था मानो वो फिर से अपनी महबूबा के चुत में लंड घुसा रहा हो.

सलोनी उसे जुड़ तक मुँह में भर चूस रही थी.देवेन उसके बालों को पकड़े बेचैनी में आहें भर रहा था & उसने अचानक लंड बाहर खींच लिया.हाँफती सलोनी ने उसे देखा & मुस्कराई.झड़ने के डर से उसने लंड खींच लिया था.उसने देवेन की टाँगे पकड़ उन्हें पलंग से नीचे लटका दिया & फिर ज़मीन पे घुटनों के बाल उनके बीच आ गयी.

“इतना सुकून मैंने कभी महसूस नहीं किया..”,उसने अपनी भारी-भरकम छातियों को अपने हाथों में थमा & देवेन के खड़े लंड को उनके बीच कस लिया.देवेन ने आ भरते हुए उसके सर को पकड़ लिया.वो अपनी छातियों को आपस में भींच उन्हें ुआप्र-नीचे कर लंड को रगड़ने लगी,”..& बसा-बसाया घर?..हुंग!….वो पति जो मुझे खिलौना समझता है & मुझसे बेवफाई कर रहा है..मैंने भी उसे धोखा दिया है. उसने लंड को & ज़ोर से रगड़ा & झुक के उसके सुपाडे को चूमा.

“..मगर वो मुझे किस वजह से धोखा दे रहा है & मुझे छोड़ना चाह रहा है सिवाय इसके की उसका मान भर गया लगता है!”,देवेन ने उसके अबल पकड़ उसे ऊपर खींचा & बिस्तर पे लेट गया & उसे ऊपर आने का इशारा किया.रामबाह ने सोचा की वो उसे ऊपर से लंड अपनी चुत में लेने को कह रहा है & वो उसके जिस्म के दोनों ओर घुटने जमकर उसपर झुकने लगी की उसने उसकी कमर पकड़ के उसे आगे किया & अपने मुँह पे बिता लिया.

“ऊव्वववव….हााअ….मुझे गुदगुदी होती है..नहीं..!”,वो हसन्ते हुए मस्त होने लगी.देवेन उसकी आंद्रूणई जांघों में अपनी नाक घुसा के ज़ोर से रगड़ उसे गुदगुदा रहा था.अगले पल उसकी जुबान उसकी चुत की दरार पे दस्तक दे रही थी.

“सलोनी,मैं नहीं जनता की तुम्हारी शादी में क्या परेशानी है मगर मेरे साथ तुम्हारा भविष्य कुच्छ भी नहीं..-“,सलोनी ने अपनी चुत उसके होठों पे दबा उसे खामोश कर दिया था.वो भी उसकी आंद्रूणई जांघों को सहलाते हुए उसकी चुत चाटने लगा था.

“-..उउन्न्ञणनह..आहह..आप मेरी जिंदगी का….

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